मोरना। शुक्रताल के हनुमत धाम में साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालु उमड़े। महामंडलेश्वर आचार्य अवधेशानंद ने कहा कि मनुष्य जीवन में ज्ञान अर्जन करना आवश्यक है। ज्ञान से आकर्षण उत्पन्न होता है। हर व्यक्ति प्रभावित होता है। ज्ञानशील व्यक्ति ही समाज का कल्याण करने में सक्षम बनता है।
हनुमत धाम की नक्षत्र वाटिका में अवधेशानंद ने कहा कि ईश्वर भाव से जीवन आध्यात्मिक बनता है। इससे साधक को सहज ज्ञानहित प्राप्त होता है। भागवत को आध्यात्मिक दीप कहा गया है। यह ज्ञान का यज्ञ है। ज्ञान का नाम ही मुक्ति है।
ज्ञान से ही शांति और सुख प्राप्त होता है। इसका जन्म श्रद्धा से होता है। एकाग्रचित्त साधक प्रभु का प्रिय बनता है। श्रीमद्भागवत कथा में जीवन के गूढ़ रहस्यों के बारे में बताया गया है। इन्हें जानने वाला मनुष्य परम सुख को प्राप्त करता है।
भौतिक सुखों का परित्याग कल्याण का मार्ग है और मन स्वत: ही प्रसन्नचित्त रहता है। इस अवसर पर ललितानंद महाराज, गुरुदत्त महाराज, केश्वानंद महाराज, गीतानंद महाराज उपस्थित रहे।
आयोजन में सतीश गुप्ता, राकेश जैन, अमित शुक्ला, योगेश गुप्ता, विवेक अग्रवाल, प्रखर गर्ग, अनूप माहेश्वरी, भुवनेश, शांतनु का सहयोग रहा।