दावों के बावजूद चिह्नित हत्यारोपियों तक नहीं पहुंच पा रही खाकी
मुजफ्फरनगर। मोरना में दवा विक्रेता अनुज कर्णवाल की दुस्साहसिक हत्या में पुलिस पूरी तरह कठघरे में है। हत्या के बाद पुलिस लगातार हत्यारोपियों को चिह्नित करने के दावे कर रही है, लेकिन उनकी परछाई तक नहीं छू पा रही है। पुलिस का जोर हत्यारोपियों तक पहुंचने पर कम, लीपापोती पर अधिक लगा हुआ है। हत्या के बाद कार्रवाई के स्थान पर पुलिस स्थानीय लोगों द्वारा दी गई जानकारियों को ही झुठलाने में लगी रही। दो दिन बाद तक भी पुलिस मेन बाजार में हुई हत्या के बाद की गई फायरिंग को झुठलाने में जुटी है, जबकि मौके से पुलिस ने तीन खोखे बरामद किए थे। घर की दीवार और एक दुकान के काउंटर पर मारी गई गोलियों के निशान भी पुलिस को नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं, हत्या के दो दिन बाद तक भी एसएसपी अभिषेक यादव का घटनास्थल तक न पहुंचना जनप्रतिनिधियों के साथ ही स्थानीय लोगों को अखर रहा है। ऐसे में साफ है कि आने वाले समय में आलोचनाओं से चौतरफा घिरी पुलिस के लिए सुलगते सवालों के जवाब देना काफी मुश्किल होगा।
सुलगते सवाल-
- हत्या के चंद घंटे बाद ही घटना में तीन हत्यारोपी शामिल होने और उन्हें चिह्नित कर लेने के दावे किए गए, लेकिन किस आधार पर, इसकी कोई जानकारी पुलिस के पास नहीं। वह भी तब, जबकि हत्यारोपी किसी सीसीटीवी कैमरे में भी कैद नहीं हुए।
- यदि पुलिस ने तीनों हत्यारोपियों को चिह्नित कर लिया है तो आखिर क्यों दो दिन बाद भी उनके फोटो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं किए गए ? स्थानीय लोगों के मोबाइलों में शनिवार को तीनों हत्यारोपियों के फोटो वायरल होते रहे, लेकिन एसपी देहात नेपाल सिंह ने किया जानकारी से इंकार।
- परिजन व व्यापारियों का दावा, खौफ फैलाने के लिए अनुज की हत्या हुई, लेकिन पुलिस इसे लेनदेन विवाद बताने पर अड़ी हुई है। विवाद का आधार क्या है, इसकी जानकारी पुलिस के पास नहीं।
- मेरठ के कपसाढ़ में हत्या करने वाले हत्यारोपियों की लोकेशन तीन दिन से लगातार मोरना क्षेत्र में मिलती रही, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठकर हत्या जैसी वारदात होने का इंतजार करती रही।
कस्बे में कई दुकानों पर ‘दुकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगे हुए हैं, लेकिन पुलिस को ये पोस्टर व व्यापारियों की पीड़ा नजर नहीं आ रही।