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कवाल कांड: लम्हे की खता...जब भाईचारे की किताब में जुड़ा नफरत का पन्ना

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गांव मलिकपुरा में बिशन अपने पौत्र गगन के साथ। स्रोतः संवाद
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जानसठ। कैराना के शायर मुजफ्फर रज्मी का शेर, लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई...कवाल गांव के दर्द को बयान करता है। 27 अगस्त 2013 को गौरव-सचिन और शाहनवाज के बीच हुए झगड़े के बाद मुजफ्फरनगर दंगा भड़क उठा था। सदियों से भाईचारे से रह रहे गांव के इतिहास पर झगड़े से दंगे का दाग भी लग गया।
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मलिकपुरा के ममेरे-फुफेरे भाई गौरव और सचिन का झगड़ा कवाल में शाहनवाज के साथ हुआ था। दोनों भाई झगडे़ के बाद अपने गांव की तरफ जा रहे थे, इस दौरान भीड़ ने घेरकर उनकी नृशंस तरीके से हत्या कर दी थी। कवाल निवासी आफताब आलम कहते हैं कि वह उस काले दिन को याद भी नहीं करना चाहते हैं। गांव में अमन शांति बनी रहे। यहां सब भाईचारे के साथ रह रहे हैं। ग्रामीण साजिद आबिद कहते हैं दोनों समुदाय के लोगों में किसी तरह का कोई मनमुटाव नहीं है। ग्रामीण अब कवाल कांड को भूलते जा रहे हैं। गांव के लोग एक दूसरे के सुख दुख में शरीक होते हैं।
धार्मिक कार्यक्रमों में भी सहयोग करते हैं ग्रामीण
ग्रामीण रविंद्र सैनी कहते हैं गांव में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में भी दोनों समुदाय के लोग सहयोग करते हैं। कांवड़ यात्रा के दोनों गांव में लगने वाले कांवड़ सेवा शिविर में मुस्लिम समाज के जिम्मेदार लोग सेवा करने में साथ खड़े रहते हैं।
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मलिकपुरा में पोता और मायके में बहू
मलिकपुरा के मृतक सचिन की पत्नी स्वाति पिछले वर्ष नौ साल बाद अपने मायके गांव पुरबालियान से बेटे गगन के साथ गांव मलिकपुरा में वापस लौट आई थी। स्वाति के अपने घर लौटने से ससुर बिशन और सास मुनेश बेहद खुश हुए थे। ससुर ने बताया कि एक महीने बाद ही स्वाति फिर मायके चली गई। पौत्र गगन दादा और दादी के साथ रह रहा है। गगन की उम्र 15 वर्ष हो चुकी है। गगन जानसठ के स्कूल में कक्षा आठ में शिक्षा ग्रहण कर रहा है।
सचिन-गौरव की हत्या में सात को उम्रकैद
सचिन और गौरव की हत्या में आठ फरवरी 2019 को कोर्ट ने आरोपी मुजस्सिम, फुरकान, मुजम्मिल, जहांगीर, नदीम, अफजाल व इकबाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरोपी जेल में सजा काट रहे हैं।
दूसरे पक्ष के परिवाद पर चल रही सुनवाई
कवाल के शाहनवाज के पिता सलीम ने भी अदालत में परिवाद दायर किया था। मृतक सचिन व गौरव के परिवार से रविंद्र, बिशन, प्रहलाद, तहेंद्र, जितेंद्र और देवेंद्र नामजद हुए थे। आरोपी जमानत पर है। इस मुकदमे में 17 सितंबर को गवाही होगी। वादी सलीम की मौत हो चुकी है।
जहां से मिली सुर्खियां, वहीं से गई सदस्यता
खतौली के पूर्व विधायक विक्रम सैनी कवाल कांड के बाद ही सुर्खियों में आए थे। दंगे में उन पर रासुका लगाई गई। जेल से छूटे तो जिला पंचायत सदस्य बने। भाजपा के टिकट पर 2017 और 2022 में खतौली से विधायक बन गए थे। कवाल कांड के मुकदमे में सजा हो जाने के बाद उनकी सदस्यता चली गई थी, बाद में उपचुनाव उनकी पत्नी हार गई थी।

गांव मलिकपुरा में बिशन अपने पौत्र गगन के साथ। स्रोतः संवाद

गांव मलिकपुरा में बिशन अपने पौत्र गगन के साथ। स्रोतः संवाद

गांव मलिकपुरा में बिशन अपने पौत्र गगन के साथ। स्रोतः संवाद

गांव मलिकपुरा में बिशन अपने पौत्र गगन के साथ। स्रोतः संवाद

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