तितावी के बघरा की दरगाह में मजलिस के आखिरी दिन शिया समाज के हजारों लोगों ने जियारत की। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई थी। शिया धर्म गुरु कल्बे जव्वाद नकवी, मौलाना यासूब, महमूद प्राचा, बहादुर अब्बास ने मजलिसों को खिताब फरमाया। मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना कल्बे जव्वाद ने हजरत इमाम अली की जिंदगी पर इल्म के हवाले से रोशनी डाली। मौलाना यासूब अब्बास ने इमाम अली की लिखी हुई किताब नहजुल बलागाह पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इन शब्दों को अपनी जिंदगी में उतारने की जरूरत है।
हमें किसी जालिम के सामने नहीं झुकना चाहिए और हमेशा सच्चाई व अच्छाई का समर्थन करना चाहिए। मौलाना फसी हैदर, मौलाना अजादार, मौलाना नाजिम अली खैराबादी, मौलाना र्फमान हुसैन अलीगढ़, मौलाना मिर्जा जावेद, मौलाना मजाहिर अब्बास, मौलाना गजम्फर अब्बास ने मजलिस को खिताब किया। दरगाह पर हजरत अब्बास के बड़े अलम के परचम जो कि कर्बला इराक़ से लाया गया था, उसकी भी जियारत लोगों ने की। अलम की जियारत के लिए लोगों का हुजूम लग गया।
दरगाह के मीडिया प्रभारी जीशान अली ने सभी का शुक्रिया किया। दरगाह में हर साल चार दिन का वार्षिक मजलिसों का आयोजन होता है। इस बार बृहस्पतिवार से रविवार तक यह आयोजन हुआ। अंजुमने आरफी बघरा व दरगाह के अध्यक्ष मोहमद अब्बास, जाहिर हसन ने प्रशासन व आम जनता का शुक्रिया अदा किया। पूर्व मंत्री ईसा रजा, शबाब जैदी, सीओ सिद्धार्थ तोमर मौजूद रहे। इमरान हुसैन, जावेद रजा, आस मोहम्मद, जामिन अब्बास, अकबर अब्बास, शबी अब्बास, रिजवान, आशिक अली, अजहर अब्बास, मोहमद इमरान, शान मोहम्मद ने दुआ कराई।