किशोर न्याय बोर्ड:12 दिन बैठकें नियत, भुगतान 20 दिन का किया
रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। जिला प्रोबेशन विभाग द्वारा किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के सदस्यों को अधिक भुगतान किए जाने का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है। सप्ताह में केवल तीन ही बैठक बोर्ड की हो सकती हैं, माह दस से 12 बैठक हो सकती हैं, लेकिन बीते चार साल के दौरान एक माह में बीस बैठकों के हिसाब से भी भुगतान कर दिया गया।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में पूछा गया था कि मुजफ्फरनगर किशोर न्याय बोर्ड की बैठक किस-किस दिन होती है। यदि बैठक नहीं होती तो क्या कार्यालय खुलता है। यदि बोर्ड बैठक नहीं है तो क्या सदस्य उपस्थिति होते हैं। एक जनवरी 2016 से अब तक प्रत्येक माह बोर्ड के सदस्यों की बैठकों में उपस्थिति और उन्हें कितना भुगतान किया गया, इसकी जानकारी मांगी गई थी। इस संबंध में जानकारी दी गई कि किशोर न्याय बोर्ड में एक सप्ताह में तीन दिन सोमवार, शुक्रवार और शनिवार को ही बैठक होती है। बाकी दिन यहां जेएम कम्पाउंड स्थित किशोर न्याय बोर्ड का कार्यालय बंद रहता है। जेजे एक्ट के नियम छह के अंतर्गत बैठक में छह घंटे मौजूद रहना जरूरी है। छह घंटे मौजूद रहने पर एक बैठक के मानदेय के रूप में 1800 रुपये दिया जाता है। बैठक के अलावा मानदेय देने का कोई प्रावधान नहीं है। जिन जिलों में डीजे और डीएम की सहमति से सप्ताह के छह दिन यानी समस्त कार्य दिवस में बैठक होती हैं, उनमें अधिकतम बीस बैठक का और अधिकतम 35 हजार रुपये का भुगतान एक माह में किया जाता है। मुजफ्फरनगर जनपद में सप्ताह में तीन दिन बैठक निश्चित होने के कारण एक माह में12 से अधिक बैठक नहीं हो सकती। बावजूद इसके बीते चार सालों से किशोर न्याय बोर्ड में सदस्य बीना शर्मा और नीरज शर्मा को अधिकतम माह में 20-20 दिन के हिसाब से ही भुगतान किया गया है। बीना शर्मा को वर्ष 2017 में जनवरी से मई तक 58 दिन का और इसके बाद प्रति माह 20 दिन के हिसाब से भुगतान हुआ। वर्ष 2018 में केवल दिसंबर माह में 18 दिन का भुगतान हुआ बाकी पूरे साल 20 दिन के हिसाब से भुगतान हुआ। 2019 में सभी 12 महीने में 20 दिन के हिसाब से ही भुगतान हुआ है। वर्ष 2020 में भी कुछ महीनों में 20 दिन का भुगतान हुआ। भुगतान की लगभग यही स्थिति किशोर बोर्ड के दूसरे सदस्य नीरज शर्मा की है। 2018 और 2019 में केवल एक माह में 19 दिन का भुगतान हुआ बाकी सभी में बीस दिन के हिसाब से ही भुगतान हुआ है। बड़ी बात यह है कि जिला जज के आदेश पर तीन दिन ही बैठक हो रही है। संवाद
15 दिन की रोस्टर ड्यूटी देते हैं: बीना
मुजफ्फरनगर। किशोर न्याय बोर्ड की सदस्या बीना शर्मा का कहना है कि न्यायालय में बैठक तो सप्ताह में तीन दिन ही होती हैं। हम दो लोग कार्यरत हैं। 15-15 दिन की हमारी रोस्टर ड्यूटी होती है। इस बीच यदि कोई केस आता है तो उसे डील किया जाता है। बैठक के अलावा रोस्टर ड्यूटी को भी जोड़ा गया है।
दो से चार दिन तक हो सकता है काम
मुजफ्फरनगर। किशोर बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार एक सप्ताह में दो से चार बैठक हो सकती हैं। पुलिस किसी बालक को लाती है तो उसकी रिमांड आदि की उपस्थिति को भी जोड़ लिया जाता है। अधिकतम बीस दिन का कार्य हो सकता है।
सप्ताह में तीन दिन होती है बैठक
मुजफ्फरनगर। जिला प्रोबेशन अधिकारी मुशफेकीन का कहना है कि किशोर न्याय बोर्ड की बैठक सप्ताह में तीन दिन सोमवार, शुकवार और शनिवार को होती है। अन्य दिन कंपाउंड बंद रहता है। जो बैठके प्रमाणित कर भेजी गई, उसी के हिसाब से भुगतान कर दिया गया। जेजे एक्ट में रोस्टर ड्यूटी के भुगतान का प्रावधान नहीं हैं। जिन जिलों में छह दिन न्यायालय खुलता हैं, वहां अधिकतम बीस दिन का भुगतान हो सकता हैं।