जिला कारागार में लगे जैमरों के सही काम नहीं करने पर अफसरों ने मोबाइल फोन कंपनी को नोटिस दिया है। सूचना देने के बावजूद कंपनी द्वारा नेटवर्क कम नहीं करने से जेल अफसर नाराज हैं। करोड़ों रुपये की लागत से लगाए गए जैमर कंपनी के कारण काम नहीं कर पा रहे हैं।
बंदियों द्वारा कारागार से फोन से गैंग संचालित करने, रंगदारी और हत्या जैसे अपराधों को अंजाम दिलाने की बातें वर्षों से सामने आ रही थीं। शासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रदेश में सबसे पहले जिला कारागार में सवा तीन करोड़ की लागत से छह जैमर लगवाए। दिल्ली की कंपनी ने अप्रैल माह में जैमर को लगाया था।
लेकिन यह काम नहीं कर रहे हैं। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने शासन को खत लिखकर मामले की जानकारी दी थी। गत माह दिल्ली से आए करीब आधा दर्जन तकनीशियनों ने जांच के बाद बताया कि दो कंपनियों ने अपनी रेंज को ज्यादा बढ़ा रखा है, जिसके चलते इन दो कंपनियों के फोन से बात होती है।
एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह ने जैमर लगाने वाली और दोनों मोबाइल कंपनी के अधिकारियों से बात कर जैमर सही नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही। एक कंपनी ने तो उसी दिन अपने नेटवर्क को कम कर दिया, लेकिन सस्ती दरों पर उपभोक्ता को बात कराने वाली कंपनी का नेटवर्क अभी भी कारागार में काम कर रहा है।
कई बार सूचना देने के बाद भी इस कंपनी के अधिकारी मामले में लापरवाही बरत रहे हैं। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने कंपनी को लिखित नोटिस भेज दिया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि जल्दी ही कंपनी अपने नेटवर्क को सही नहीं करती है तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। यदि कंपनी सहयोग नहीं करेगी तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।