जमीयत की बैठक में पदाधिकारियों के विचार सुनते लोग
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देवबंद (सहारनपुर)। नागरिकता संशोधन कानून, एनपीआर और संभावित एनआरसी के विरोध में जमीयत उलमा-ए-हिंद (मौलाना महमूद मदनी गुट) की बैठक में जनपद के सभी मदरसा संचालकों, मुतवल्लियों और इमामों ने शिरकत की। जिसमें सर्वसम्मति से एनपीआर का बायकाट करने और कागज नहीं दिखाने समेत कई प्रस्ताव पारित किए गए। इसके साथ ही सभी वर्गों का सहयोग लेकर आंदोलन को गति देने का आह्वान भी किया गया।
बृहस्पतिवार को ईदगाह मार्ग स्थित शेखुल हिंद हाल में आयोजित हुई जमीयत उलमा-ए-हिंद की बैठक में प्रदेश सचिव जहीन अहमद ने कहा कि वर्तमान समय में देश बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। सरकार संविधान की धज्जियां उड़ाकर देश की जनता को धर्म के नाम पर बांटने का काम कर रही है। सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर जमीयत ने जो आंदोलन शुरू किया है उसे जारी रखा जाएगा। अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष मौलाना जहूर कासमी ने कहा कि संवैधानिक देश होने के कारण यहां का संविधान सभी को बराबर का हक देता है। धार्मिक तौर पर बांटने की आजादी किसी को नहीं है। आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश की जनता को धर्म के आधार पर बांटने के लिए सीएए लेकर आई है। उन्होंने मस्जिदों के मुतवल्लियों और इमामों को कहा कि वह अपनी बात कहने से पीछे न हटें और किसी खौफ में न आएं। जमीयत हर जगह उनके साथ खड़ी हुई है। जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह के शिक्षा प्रभारी मौलाना फुजैल नासरी, मौलाना सरताज अहमद, दीनी तालीमी बोर्ड के मौलाना शोएब कासमी, मौलाना ताहिर, मौलाना अलताफ और मौलाना इरफान ने भी विचार व्यक्त किए। बैठक में एनपीआर का बायकाट करने तथा कागज नहीं दिखाए जाने समेत कई प्रस्ताव भी पारित किए गए। इसके साथ ही उलमा ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और देवबंद के मदरसा छात्रों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की मांग भी की। संचालन मौलाना इब्राहीम कासमी ने किया। इस मौके पर मौलाना खलील, उमैर उस्मानी, हाजी अनवर, वसीउल्लाह, सलीम उस्मानी, मौलाना मुशर्रफ, चौधरी सादिक आदि मौजूद रहे।
सीएए के विरोध में जमीयत की बैठक में विचार रखते पदाधिकारी- फोटो : DEVBAND