फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘जैन धर्म में वर्षा योग का बहुत महत्व’

विज्ञापन
खतौली में जक्कीवाला जैन मंदिर में आयोजित समारोह में उपस्थित महिला श्रद्धालु। - फोटो : KHATAULI
विज्ञापन
खतौली। बिददीवाड़ा स्थति जक्कीवाला जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने शिवभूषण महाराज का पिच्छी परिवर्तन समारोह और चातुर्मास निष्ठापन मांगलिक क्रियाओं से संपन्न कराया। पंडित अशोक शास्त्री ने मंत्रोच्चार के साथ चातुर्मास निष्ठापन की मांगलिक क्रियाएं कराई। मुनिश्री शिवभूषण महाराज ने बताया कि जैन परंपरा में वर्षा योग का बहुत महत्व होता है।
विज्ञापन

सोमवार को प्रात:काल में सुश्रावकों ने चातुर्मास निष्ठापन के लिए चौबीस तीर्थंकर की भक्तिभाव से पूजा आराधना की। आयोजन के मुख्य अतिथि मुकेश पंप वाले, रामकुमार व विनोद ठेकेदार रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ राजीव बैंक वाले व मुकेश एडवोकेट ने धर्म ध्वजारोहण कर किया। भगवान महावीर के चित्र का अनावरण टीकरी परिवार ने किया। इसके पश्चात ज्ञान के दीप का प्रज्जवलन करके धर्म पालन व ज्ञान के प्रकाश प्रसार का संकल्प किया गया। भक्तों ने मुनिश्री के चरण प्रक्षालन व शास्त्र भेंट का कार्य श्रद्धाभाव से किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई।
धर्मसभा का संचालन करते हुए कल्पेंद्र जैन ने बताया कि मुनिश्री शिवभूषण महाराज कठोर धर्म साधना का पालन करते हैं। उनके जीवन के त्यागी अनुकरणीय हैं। मुनिश्री शिवभूषण महाराज ने बताया कि जैन परंपरा में वर्षा योग का बहुत महत्व है। जैन दर्शन में कलश मंगल का प्रतीक है और चातुर्मास भी मंगल का प्रतीक है। साधुजन वर्षा स्थापना संयम की रक्षा के लिए करते हैं। चातुर्मास काल में साधुजनों को चार माह तक एक ही स्थान पर रहने से ध्यान, चिंतन व स्वाध्याय का अधिक अवसर मिलता है। संयोजन सुशील मंडी व संजय दादरी ने किया। अध्यक्षता धर्मनिष्ठ विजय सराफ ने की। मौके पर राजेंद्र, सुनील, पदमसेन, वीरेश, संजय, सुभाष, सुबोध, जयकुमार, सुदेश, विनोद, चंद्रबोस, अजय, सुरेंद्र, नीरज आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें