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संकल्प को बॉर्डर पार करने में लग गए 16 घंटे

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यूक्रेन से लौटा संकल्प अपने पिता के साथ - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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संकल्प को बॉर्डर पार करने में लग गए 16 घंटे
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मुजफ्फरनगर। यूक्रेन में रोमानिया बॉर्डर पर फंसा संकल्प घर लौट आया है। छात्र ने कहा कि सबसे ज्यादा समय बॉर्डर पार करने में लगा। इसकी वजह यह रही कि स्थानीय लोग भी बॉर्डर पर पहुंच गए हैं। वह खुद यूक्रेन छोड़ रहे हैं, जिससे भारतीय छात्र-छात्राओं के सामने मुश्किल हालात खड़े हुए थे, लेकिन अब राहत मिलनी शुरू हो गई है।
नई मंडी निवासी बैंक मैनेजर आशीष प्रसाद का बेटा संकल्प यूक्रेन से एमबीबीएस कर रहा है। शुक्रवार को घर पहुंचे संकल्प ने बताया कि खराब मौसम भी चुनौती बना रहा। विभिन्न शहरों में रह रहे छात्र रोमानिया बॉर्डर की ओर बढ़ गए थे। रूस के हमले के बाद यहां एकाएक भीड़ लग गई। सबसे ज्यादा भीड़ बॉर्डर के इलाके में रह रहे यूक्रेन के नागरिकों की थी, जो खुद रोमानिया पहुंचना चाह रहे थे। ऐसे लोगों की वजह से छात्र-छात्राओं को दिक्कत हुई। इसके बाद यूक्रेन और रोमानिया के कुछ समाजसेवी संगठन सामने आए और उन्होंने छात्र-छात्राओं की मदद की। उन्हें भोजन और रहने का इंतजाम किया। बॉर्डर पार होने के बाद किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई। पिता आशीष प्रसाद, माता सुमन देवी की खुशी का ठिकाना नहीं है। सैदपुर गांव के प्रधान और संकल्प के मामा नीरज कुमार का कहना है कि परिवार बेहद खुश है।
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हाथों में तिरंगा न होता तो मुश्किल होती वतन वापसी
जानसठ। ककरौली क्षेत्र के गांव कम्हेड़ा निवासी मुस्तकीम पुत्र हुसैन अहमद दो वर्ष से यूक्रेन के शहर टरनोपी में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। छात्र ने बताया कि 25 फरवरी को दोस्तों के साथ वह रोमानिया बॉर्डर की ओर चला था। बमुश्किल बॉर्डर पार हुआ। यहां पर खाने-पीने और ठहरने की पूरी व्यवस्था थी। तीन मार्च को उनको फ्लाइट मिली। फ्लाइट में बैठकर वह अपने वतन तक पहुंचा। शुक्रवार को मुस्तकीम के घर पहुंचने पर परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों और परिचितों का छात्र से मिलने को लेकर उसके घर पर तांता लगा हुआ है। छात्र ने बताया कि उनके हाथों में तिरंगा था, जिसे देखकर ही रोमानिया बॉर्डर पार कर सके। अगर उनके हाथों में तिरंगा नहीं होता तो वतन वापसी मुश्किल हो जाती।
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