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घरेलू न्याय विफल होने पर अंतरराष्ट्रीय मंच बनता है सहारा : प्रो. प्रिसिला

Wed, 20 May 2026 10:10 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
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चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के लीगल स्टीज विभाग के मुथकोट में ऑनलाइन व्याख्यान में भाग लेते छात्
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सीसीएसयू के विधि अध्ययन संस्थान में विशेष व्याख्यान का आयोजन
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संस्थान में बुधवार को क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार न्यायालयों के समक्ष रणनीतिक मानवाधिकार कानूनी विवाद विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो. प्रिसिला कैनेपारो रहीं।
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कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के समन्वयक डॉ. विवेक कुमार ने किया और वक्ता का परिचय देते हुए उनके अंतरराष्ट्रीय कानून एवं मानवाधिकार क्षेत्र में योगदान पर प्रकाश डाला। प्रो. प्रिसिला कैनेपारो ने व्याख्यान में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विकसित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण प्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यूरोपीय, अफ्रीकी और इंटर-अमेरिकन मानवाधिकार प्रणालियों की संरचना, कार्यप्रणाली और उनके न्यायालयों की भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों का उद्देश्य राज्यों की जिम्मेदारी को समाप्त करना नहीं, बल्कि मानवाधिकार संरक्षण को और मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि अंतराष्ट्रीय क्षेत्राधिकार पूरकता एवं अनुपूरकता के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके तहत पहले घरेलू न्यायिक उपायों का प्रयोग आवश्यक होता है। इसके बाद ही पीड़ित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर न्याय की मांग कर सकते हैं। व्याख्यान में मानवाधिकार न्यायालयों के समक्ष मौखिक पैरवी, पीड़ितों के अधिकार, मुआवजा व्यवस्था और रणनीतिक मुकदमेबाजी की प्रक्रियाओं पर भी चर्चा हुई।
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