मुजफ्फरनगर। गंगा और सोलानी नदी के बीच छह हजार हेक्टेयर में फैला हैदरपुर वेटलैंड जैव विविधता का केंद्र बना हुआ है। एशिया में संकटग्रस्त स्थिति में पहुंच चुकी इंडियन स्कीमर हैदपुर वेटलैंड पर दिखाई दी है। पक्षी विशेषज्ञों ने अभी तक चार स्कीमर स्पॉट किए हैं।
यह पक्षी इन दिनों वेटलैंड और गंगा किनारे के क्षेत्रों में प्रजनन के लिए स्थान तलाशने के लिए आता है। इसे पनचीरा भी कहते हैं। सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल और म्यांमार में इंडियन स्कीमर पक्षी की कम होती संख्या चिंता बढ़ाने वाली है। करीब दो साल पहले भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून ने इसके बचाव के लिए कार्य भी शुरू किया था। पक्षी विशेषज्ञ आशीष लोया बताते हैं कि पिछले वर्ष हैदरपुर वेटलैंड पर करीब 35 की संख्या में प्रजनन के लिए इंडियन स्कीमर दिखाई दी थी, लेकिन इस साल अभी तक संख्या सिर्फ चार ही है।
पक्षी विशेषज्ञ आशीष लोया कहते हैं कि इंडियन स्कीमर को बचाए जाने की आवश्यकता है। आम आदमी के अलावा प्रशासन को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
- इसलिए खास है इंडियन स्कीमर
गुलाबी लंबी चोंच, सफेद गर्दन, गुलाबी पैर और काले रंग का धड़ इंडियन स्कीमर को आकर्षक बनाता है। शिकार के दौरान पंखों को हिलाते हुए मुंह खोलकर नदी के पानी को चीरते हुए निकलने का दृश्य किसी रोमांच पैदा करता है। यही वजह है कि इसे पनचीरा भी कहते हैं।
- रामसर साइट है हैदरपुर वेटलैंड
ईरान के शहर रामसर में दो फरवरी सन 1971 को एक सम्मेलन हुआ। इसमें शामिल राष्ट्रों ने वेटलैंड के संरक्षण से संबंधित एक समझौता हुआ और यह 21 दिसंबर 1975 से प्रभाव में आ गया। रामसर स्थल की परिभाषा के अनुसार वेटलैंड ऐसा स्थान है, जहां वर्ष में कम से कम आठ माह पानी भरा रहता हो और 200 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी रहती हो। हैदरपुर वेटलैंड को रामसर साइट माना गया है।