फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विजय दिवस:- 16 दिसंबर-

विज्ञापन
सोंटा निवासी पूर्व सैनिक हरबीर सिंह राठी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
विज्ञापन
हर रोज पाकिस्तान पर भारी पड़ती थी भारतीय सेना
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर, मंसूरपुर। सोंटा निवासी सेवानिवृत्त सैनिक हरबीर सिंह राठी वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध लड़े थे। आज भी 80 वर्ष की उम्र में भी हरबीर सिंह का हौसला और जज्बा एक नौजवान सैनिक की तरह कायम है। वे 1971 के युद्ध के बारे में चर्चा करते ही कहते हैं कि उस समय पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए थे। यदि आज पाकिस्तान ने ऐसी हिमाकत की, तो पाकिस्तान के कई टुकड़े हो जाएंगे।
सोंटा के हरबीर सिंह राठी वर्ष 1962 में भारतीय सेना इंजीनियरिंग रेंजीमेंट में भर्ती हुए थे । वर्ष 1971 के युद्ध के दौरान उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के छम सेक्टर में थी। वे युद्ध को याद करते हुए बताते हैं कि छम सेक्टर में रावी नदी के एक ओर पाकिस्तानी सेना तथा दूसरी ओर भारतीय सेना थी। भारतीय सेना के पास उस समय गोला बारूद की कोई कमी नहीं थी। लगभग दो सप्ताह तक चले युद्ध में हर रोज भारतीय सेना पाकिस्तान सेना पर भारी पड़ रही थी। भारतीय सेना हर रोज पाकिस्तानी सेना के गोला बारूद टैंक, लड़ाकू विमान नष्ट कर आगे बढ़ती जा रही थी। उनकी रेजीमेंट ने रावी नदी पर बने एक पुल को नष्ट किया था, जिससे होकर पाकिस्तानी सेना आ रही थी। उनकी रेजीमेंट का एक जीप ड्राइवर जो पश्चिम बंगाल का रहने वाला था वह गोली लगने से वीरगति को प्राप्त हो गया था। वह बताते हैं कि यह युद्ध तीन दिसंबर 1971 को शुरू हुआ तथा 16 दिसंबर को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के करीब नब्बे हजार सैनिकों को बंदी बना लिया और पाकिस्तान के पूर्वी भाग को अलग कर दूसरा देश बांग्लादेश के रूप में बना दिया। पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण करने के बाद ही युद्ध समाप्त हुआ था। वे सेना में वर्ष 1962 से 1977 तक रहे।
विज्ञापन

पाक को दिया था करारा जवाब
भोपा। वर्ष 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में भोपा के गांव छछरौली निवासी हरि प्रकाश चौहान शंकरगढ़ सेक्टर में नदी के पुल अपनी प्लाटून के साथ तैनात थे। उसी समय पाकिस्तानी फौज द्वारा एयर जहाज के माध्यम से नदी के पुल को ध्वस्त करने की योजना थी। उस वक्त उनकी तैनाती एयर गन पर थी। पूरी तरह से मुस्तैद देख पाकिस्तानी एयर जहाज को लौटना पड़ा था। उन्होंने कहा की भारतीय सैनिकों ने दुनिया में हर स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। एक बार पाकिस्तान सीमा पर गोलीबारी के दौरान पाकिस्तान की आधा दर्जन महिलाएं फंस गई थी, जिन्हें उनकी टीम द्वारा अधिकारियों की दिशा निर्देशन में सकुशल वापस भेजा गया था। हरि प्रकाश चौहान राष्ट्रीय सैनिक संगठन के मोरना ब्लॉक के अध्यक्ष है।
गोयला के लांस नायक जयपाल सिंह ने पाई थी शहादत
शाहपुर। गांव गोयला निवासी लांस नायक जयपाल सिंह सन 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान के युद्ध में शहीद हो गए थे। शहीद लांस नायक के सम्मान में गांव का जूनियर हाईस्कूल उनके नाम से है।
विज्ञापन

गोयला निवासी शहीद लांस नायक जयपाल सिंह के भाई रिटायर्ड सूबेदार इंदल सिंह ने बताया कि शहीद लांसनायक छह भाइयों में तीसरे नंबर के थे। वे 1963 में भारतीय सेना की नौ-जाट रेजीमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। सन 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान के युद्ध में वह जम्मू के छमजोड़िया सेक्टर में सीमा पर तैनात थे। उन्होंने युद्ध में दुश्मन सेना के छक्के छुड़ा दिए थे, किंतु वह इस युद्ध में शहीद हो गए थे। शहीद लांसनायक अविवाहित थे। जिसके चलते परिजनों को कोई सरकारी सुविधा या आर्थिक मदद नहीं मिली थी। सन 1990 में सरकार द्वारा उनके सम्मान में गांव में सरकारी जूनियर हाईस्कूल का नाम शहीद जयपाल सिंह जूनियर हाईस्कूल घोषित किया गया। इंदल सिंह ने बताया कि उनके परिवार में देश भक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा है। वह स्वयं सेना में जाट रेजीमेंट- 11 में भर्ती हुए थे और सूबेदार के पद से रिटायर हुए हैं। उनसे छोटे भाई धर्मपाल सिंह भी सेना से सेवानिवृत्त हुए है। बड़े भाई स्वर्गीय महावीर सिंह के दो पुत्र व दो पौत्र सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं।

गोयला निवासी शहीद लांस नायक जयपाल सिंह की फ़ाइल फोटो।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

छछरौली निवासी पूर्व सैनिक हरिप्रकाश चौहान।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें