चुनाव को लेकर नेताओं और उनके समर्थकों ने भी तीर-कमान संभाल लिए हैं। जनता के बीच पहुंचने वाले सियासी दलों के साथ निर्दलीय भी कम नहीं हैं। पिछले चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार जीते भले ही न हों, लेकिन दिग्गजों का गणित बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वर्ष 2007 में खतौली विधानसभा में निर्दलीय उम्मीदवार विनोद कुमार ने 12 हजार 395 वोट हासिल किए थे। चरथावल के विजयपाल को 1013, खतौली में राजेंद्र सिंह को 1170 वोट मिले थे।
सूबे में सियासी दंगल का आगाज हो गया है। पहले चरण में जनपद में 11 फरवरी को मतदान होना है। हालांकि बड़े दलों के प्रत्याशियों ने नामांकन कक्षों में अभी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने समीकरण बनाकर ताल ठोकने की तैयारी कर ली है। ऐसे उम्मीदवारों के लिए सबसे खास खतौली विधानसभा रही है। यहां पर बड़े दिग्गजों के पिछले दो चुनावों से निर्दलीय वोट काटने में कामयाब रहे हैं।
वर्ष 2007 का चुनाव भी खतौली सीट पर दिलचस्प रहा। यहां पर निर्दलीय उम्मीदवार विनोद कुमार ने मैदान में उतरकर दिग्गजों के साथ सियासी दलों को भी आईना दिखाया था। विनोद को 12,395 वोट मिले थे। यह वोट कई छोटे सियासी दलों के प्रत्याशियों से अधिक रहे थे। बहुजन किसान दल के प्रत्याशी राकेश टिकैत को भी यहां 9095 मत मिल पाए थे, जो विनोद से 3300 वोट कम थे। इसके अलावा भी राजेंद्र सिंह ने अपनी बिरादरी के करीब 1170 वोट लेकर कई प्रत्याशियों का चुनाव प्रभावित किया।
चरथावल में विजय पाल 1013 ने भी वोट काटने का काम किया था। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में खतौली में प्रत्याशियों का गणित निर्दलियों के कारण बिगड़ा था। यहां पर सबसे अधिक नुकसान सपा और बसपा को हुआ। निर्दलीय उम्मीदवार शाहनवाज को 6818 वोट मिले, जबकि प्रमोद कुमार उर्फ अन्ना ने 7021 और विजयपाल ने 1250 वोट लिए। शाहनवाज को मिले मतों का असर सपा के लिए घातक रहा, जबकि प्रमोद कुमार के कारण बसपा को झटका लगा।
बुढ़ाना सीट पर दूसरे उम्मीदवार विनोद कुमार ने 1292 वोट लेकर सियासी दलों के उम्मीदवारों को झटका दिया। चरथावल विधानसभा में तपेंद्र ने 1963, राजरानी ने 1390 वोट लेकर कई दिग्गजों के खेल को प्रभावित किया। पुरकाजी विधानसभा में संतराम ने 2551 वोट लेकर खेल बिगाड़ने में मुख्य भूमिका निभाई। इस बार विधानसभाओं में प्रत्याशियों के समर्थकों ने अपने हिसाब से गणित बिठाना शुरू कर दिया है। साथ ही निर्दलीय उम्मीदवारी ठोकने के दावे कर रहे लोगों पर भी सीधी नजर बनाए हुए हैं।