नगर पालिका में ईओ का घेराव करते सफाई कर्मचारी।
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पालिका में सफाई कर्मियों ने किया ईओ का घेराव
मुजफ्फरनगर। शहर में ठेके पर रखे गए सैकड़ों सफाई कर्मचारियों को तीन महीने का वेतन नहीं मिलने से पालिका प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्याप्त हो गया। सफाई कर्मचारियों ने वेतन का भुगतान कराने की मांग को लेकर अधिशासी अधिकारी (ईओ) का घेराव किया। अधिशासी अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन देकर उनके गुस्से को शांत किया।
शहर में एटूजेड इनफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के द्वारा सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बंद कर देने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था ठप हो चुकी थी। इसके बाद शहरी सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पालिका प्रशासन की ओर से साल 2019 में गाजियाबाद की प्राइवेट कंपनी आरके इंफ्रास्ट्रक्चर को ठेका दिया था। कंपनी के मैनेजर द्वारा शहर में बाजारों में सफाई कार्य के लिए ठेके पर सैकड़ों कर्मचारियों की भर्ती की। इन कर्मचारियों के द्वारा करीब तीन माह तक कंपनी के साथ हुए अनुबंध के आधार पर सफाई कार्य किया, लेकिन इसके बाद कंपनी यहां से भाग गई थी। इन कर्मचारियों का तीन माह का वेतन भी कंपनी द्वारा नहीं दिया गया। इसके बाद से ही इन कर्मचारियों के द्वारा लगातार प्रदर्शन करते हुए पालिका प्रशासन से भुगतान मांगा जा रहा है। वहीं, पालिका प्रशासन द्वारा तकनीकी तौर पर इन कर्मचारियों से कोई अनुबंध नहीं होने के कारण भुगतान करने में असमर्थता व्यक्त की जा रही है।
सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चमनलाल ढिंगान ने पालिका में ईओ हेमराज सिंह से मुलाकात करते हुए वार्ता कराई। इस दौरान इन कर्मचारियों ने ईओ का घेराव करते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। काफी महिलाएं इस प्रदर्शन में शामिल रहीं। चमनलाल ढिंगान ने ईओ से कहा कि जब पालिका इनको अपना कर्मचारी या कोई संबंध नहीं मानती, तो कंपनी के साथ कार्य करने के लिए पालिका प्रशासन की ओर से इन कर्मचारियों को सफाई उपकरण अपने स्तर से क्यों उपलब्ध कराए गए थे। ईओ द्वारा भुगतान नहीं करने की बात कही गई, तो कर्मचारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। जिससे वहां पर तनाव सा बन गया। सफाई कर्मी नेता गुरू के साथ कई महिलाओं ने आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी। करीब साढ़े तीन घंटे तक ईओ का घेराव और प्रदर्शन चलता रहा। ईओ हेमराज सिंह ने बताया कि तकनीकी खामी के कारण इन कर्मचारियों का भुगतान करने में समस्या पैदा हो रही थी। इसके लिए विधिक अभिमत प्राप्त करने के बाद छह जुलाई को संपन्न बोर्ड बैठक में भुगतान संबंधी प्रस्ताव लाया गया। ईओ के साथ लगातार बहस और नोकझोंक के बाद कर्मचारी उनके आश्वासन पर आश्वस्त होकर वापस लौट गये।