मुजफ्फरनगर। मीरापुर उपचुनाव में सपा की हार की वजह कम मतदान और मुस्लिम मतों का बंटवारा रहा। सपा का पीडीए का फार्मूला नहीं चल सका। अल्पसंख्यकों के साथ दूसरी बिरादरी खड़ी नहीं हुई। अकेले दम पर मुस्लिम चुनाव नहीं जीत पाए।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रत्याशी अरशद राना ने सपा के वोट बैंक में सेंधमारी की। अरशद को 18867 वोट मिले। आसपा के जाहिद हुसैन ने 22400 हासिल किए, इनमें भी आधी संख्या मुस्लिम मतों की मानी जा रही है।
उपचुनाव में 57.10 प्रतिशत मतदान से सपा के खेमे की चिंता बढ़ गई थी। पिछले लोकसभा चुनाव से तुलना करें तो मुस्लिमों का मतदान औसत 10 फीसदी कम रहा। सपा के गढ़ माने जाने वाले सीकरी, नंगला बुजुर्ग, ककरौली, किशनपुर समेत करीब 16 गांव ऐसे हैं, जहां सपा की उम्मीद से कहीं कम मतदान हुआ था। चुनाव आयोग तक भी शिकायतें की गई।
कम मतदान प्रतिशत के बाद सपा के लिए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने मुश्किलें खड़ी कर दी। प्रत्येक चरण में सपा के वोट बैंक में पतंग की सेंधमारी देखी जा सकती है। अरशद राना 18867 वोट लेने में कामयाब रहे, जिससे सपा मुकाबले से बाहर हो गई और रालोद ने 30426 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
शुरु से आखिर तक पतंग ने भरी उड़ान : एआईएमआईएम के प्रत्याशी अरशद राना ने पहले से आखिरी चक्र तक सपा के मतों में सेंधमारी की। वह बसपा पर तो भारी पड़े ही साथ में कई जगह आसपा प्रत्याशी जाहिद को भी चुनौती दी।
पालिका में भी पतंग ने रोकी थी सपा की राह : शहर पालिका सीट के चुनाव में भी एआईएमआईएम के प्रत्याशी ने समाजवादी पार्टी की राह में मुश्किलें खड़ी कर दी थी। मुस्लिम इलाकों में पतंग को खूब पसंद किया गया, जिस कारण सपा प्रत्याशी राकेश शर्मा को हार का सामना करना पड़ा था।