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राजनीति बाद में, पहले मुझे मेरा बेटा चाहिए

Fri, 15 Jul 2016 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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बसपा कार्यालय पहुंचे जौला के ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
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बुढ़ाना से बसपा प्रत्याशी आरिफ जौला के अपहरण को जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे ही चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। मेरठ के कंकरखेड़ा बाईपास से अपहरण के 48 घंटे बाद भी आरिफ का कोई सुराग नहीं मिलने से जौला में आक्रोश है। उनके पिता मोहम्मद हनीफ ने कहा कि राजनीति बाद में है, पहले बेटे की सलामती जरूरी है। 

बड़े कारोबारी और बसपा उम्मीदवार आरिफ जौला के अपहरण से मेरठ से जौला तक दहशत पसरी है। जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है, ग्रामीणों और परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। पुलिस अभी तक कोई सुराग नहीं लगा पाई है। पिछले 48 घंटे से आईजी मेरठ के निर्देश पर एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की टीमें आरिफ को तलाशने में जुटी हैं।
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अपहरण के बाद आरिफ को रखे जाने के संदिग्ध इलाकों पर भी ड्रोन कैमरों के जरिए तलाशी का भी कोई फायदा नहीं मिला है। बुढ़ाना क्षेत्र की राजनीति का केंद्र जौला गांव रहा है, लेकिन जिस तरीके से आरिफ का अपहरण किया गया, उससे गांव के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी इस मुद्दे पर एक हो गए हैं। हर कोई आरिफ की सलामती चाहता है।

मंगलवार को मेरठ के कंकरखेड़ा बाईपास डाबका गांव के पास  आरिफ की स्कॉर्पियो कार खड़ी मिली थी। परिजनों को मोबाइल पर आई कॉल से घटना की जानकारी मिली थी। बृहस्पतिवार को जौला में ग्रामीणों की बैठक हुई, जिसमें आरिफ के पिता मो. हनीफ और जौला के प्रधानपति हाजी जमशेद ने चिंता जताई। हनीफ ने कहा कि राजनीति बाद की बात है, अभी तो बेटे की जिंदगी उनके लिए अहम है।

उन्हें चुनाव नहीं अपना बेटा चाहिए। सियासत को लेकर अलग-अलग गुटों में बंटे प्रतिद्वंद्वी भी आरिफ की सलामती के लिए एक पटल पर खड़े दिखाई दिए। गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस और एलआईयू की टीमें खुफिया तरीके से मामले पर नजर बनाए हुए हैं। जौला के ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल आईजी मेरठ से मिला। प्रतिनिधिमंडल में हाजी जमशेद, ताहिर ठेकेदार, मोमीन, बाबू हसन, हनीफ, जिला पंचायत सदस्य जब्बार सहित दर्जनों लोग शामिल रहे। फिलहाल बसपा प्रत्याशी की कोई खबर नहीं मिलने से अलग-अलग आशंकाओं को लेकर जौला में आक्रोश है। 

नसीमुद्दीन ने की हनीफ से बातचीत 
चरथावल आए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आरिफ के पिता हनीफ से फोन पर वार्ता कर जौला आने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में किन्ही कारणों से उन्हें गांव आने से मना कर दिया गया। 
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तीन माह पहले बने थे प्रत्याशी 
तीन माह पहले सियासत के मंच पर आए मो. आरिफ जौला के अपहरण के पीछे का सच क्या है, यह कोई नहीं जानता। कारोबार में चमकने के बाद बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी से हुई नजदीकियों की वजह से उन्हें पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी बनाया था। दो जुलाई को कसबे में पहुंचे नसीमुद्दीन ने एक इफ्तार पार्टी में आरिफ को सपोर्ट करने की अपील की थी। अचानक अपहरण की घटना के पीछे क्या रहस्य है, अभी तक पुलिस भी सुराग नहीं लगा पाई है। 
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