पुरकाजी थाने में खड़ी प्रवासी मजदूरों की साइकिलें।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
कबाड़ में तब्दील हो रहीं मजदूरों की ‘हमसफर’
मुजफ्फरनगर। लॉकडाउन के दौरान दूरदराज के प्रदेशों से अपने घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों की साइकिलें जनपद के कई थानों में खड़ी कर उन्हें बसों से घर भेजा गया था। लॉकडाउन खत्म होने के बावजूद अब तक कोई मजदूर अपनी साइकिलें लेने नहीं आया। नतीजतन ये साइकिलें अब थाना परिसर में खड़ी-खड़ी कबाड़ में तब्दील होने लगी हैं।
लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में हरियाणा, पंजाब आदि प्रांतों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर अपने मूल घरों को लौटने के लिए सड़कों पर निकल पड़े थे। इनमें से बड़ी संख्या में मजदूरों ने हजारों किलोमीटर दूर स्थित घरों को लौटने के लिए अपने पास मौजूद जमा पूंजी से साइकिलें खरीदीं थीं। प्रवासी मजदूरों की घर वापसी की इस जद्दोजहद को लेकर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी, जिसके बाद शासन के आदेश पर सभी जनपदों के आला अफसरों को मजदूरों को जहां हैं, वहीं रोककर उन्हें वहां से रोडवेज बस के माध्यम से घर तक भेजे जाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद सभी थानों में प्रवासी मजदूरों को पकड़कर उन्हें रोडवेज बस से उनके गंतव्य स्थान को भेजा गया था। उनके पास मौजूद साइकिलें व रेहड़े पुलिस ने कब्जे में लेकर थाने में खड़े करा दिए थे। मजदूरों को लॉकडाउन खत्म होने के बाद ये साइकिलें ले जाने के लिए कहा गया था। इनमें जानसठ क्षेत्र में सबसे अधिक 107 मजदूरों की साइकिलें व एक रेहड़ा गांव कवाल स्थित राजकीय इंटर कॉलेज प्रांगण में खड़ी कराई गईं थीं। मीरापुर की बीआईटी चेकपोस्ट पर 29 साइकिलें व एक रेहड़ा, पुरकाजी थाना परिसर में 24, खतौली कोतवाली में 16 साइकिलें, रामराज थाने में 15 साइकिलें व एक रेहड़ा और छपार थाने में 12 साइकिलें खड़ी कराईं गईं थीं। लॉकडाउन खत्म होने के बावजूद अब तक कोई भी मजदूर अपनी साइकिल लेने के लिए नहीं पहुंचा है। इस कारण ये साइकिलें व रेहड़े थाना परिसर में खड़े-खड़े रखरखाव के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या में साइकिलें तो अब चलाने योग्य भी नहीं रह गईं हैं।