मुजफ्फरनगर। अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में कामयाबी के कदम बढ़ाती दिव्या काकरान जैसी नई प्रतिभा को ढूंढ पाना मुश्किल दिख रहा है। जिले में महिला पहलवानों के लिए न पूरे संसाधन है और न ही वूमन कोच। ऐसे अखाड़े भी नगण्य है, जो बेटियों को विधिवत प्रशिक्षण दे पाएं।
खुद की मेहनत से चमकी पहलवान दिव्या ने विश्व स्तर पर भारत को पदक दिलाए हैं। मंसूरपुर क्षेत्र के गांव पुरबालियान की बेटी दिव्या को तराशने में उनके पिता सूरजवीर और मां संयोगिता का कड़ा संघर्ष है। सिर्फ कुश्ती के मकसद को लेकर आगे बढ़ी यह बेटी ने पहले ही कामनवेल्थ गोल्ड कोस्ट और जकार्ता एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतकर अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती में सफल आगाज कर चुकी है। कुश्ती में उनके चमकने के बाद उम्मीदें बंधी थीं कि जिले में महिला पहलवानों को तैयार करने का माहौल बनेगा। दिव्या जैसी प्रतिभाएं आगे आएंगी, लेकिन वास्तविकता निराश करती हैं। चौधरी चरण सिंह जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में बालिकाओं को कुश्ती सीखने को कोई भी महिला प्रशिक्षक नहीं है। एकमात्र कुश्ती प्रशिक्षक जितेंद्र कुमार ही बालिकाओं को कोचिंग दे रहे हैं। फिलहाल स्टेडियम में 10 से 16 वर्ष आयु की दस महिला पहलवान प्रशिक्षु है।
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अखाड़े भी नहीं रहे
मुजफ्फरनगर। दंगल और अखाड़े कभी जिले की पहचान हुआ करते थे, मगर अब ग्रामीण अंचल में भी ऐसे अखाड़े कम हैं, जहां बेटियों में विश्व स्तरीय पहलवान बनाने की क्षमता पैदा की जा सके। शाहपुर के गढ़ी नौआबाद गांव में अमरदीप बेटियों का दंगल अवश्य कराते हैं। जिले में खेल निदेशालय से लेकर जिला प्रशासन का कोई ध्यान बालिका कुश्ती के आयोजन पर नहीं है। खेलों से जुड़ी संस्थाएं भी महिला कुश्ती को उपेक्षित किए हैं। दिव्या भी मानती हैं कि महिला कुश्ती में नई प्रतिभाएं तभी चमकेगी, जब उन्हें पर्याप्त संसाधन और उच्च स्तरीय कोचिंग मिलेगी।
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सुनहरे कल का संकेत दे रही प्रशिक्षु महिला मल्ल
मुजफ्फरनगर। स्पोर्ट्स स्टेडियम के इंडोर हाल में कुश्ती की प्रशिक्षु महिला खिलाड़ियों में बढ़ेड़ी की आयशा उर्फ गोलू, पचेंडा की रिया चौधरी एवं मीनाक्षी, धंधेड़ा की नगमा, खालापार की नजमा सुनहरे भविष्य का संकेत दे रही हैं। कोच जितेंद्र कुमार ने बताया कि ये महिला पहलवान मंडल से राज्य स्तर तक प्रतिभा साबित कर चुकी है।
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इन्होंने कहा
- जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में वेटलिफ्टिंग, जुड़ो, ताइक्वांडो, क्रिकेट में महिला प्रशिक्षक उपलब्ध है, लेकिन कुश्ती में नहीं है। कोच जितेंद्र कुमार ही महिला पहलवानों को कोचिंग देते है। - राज कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी।
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- बेटियों को पूरा मौका दें
- बेटी ने उनका जीवन संवार दिया। बेटियों को आगे बढ़ने का भरपूर मौका देना चाहिए। जिले में दिव्या जैसी बेटियों की कमी नहीं है, बस उन्हें मौका देकर प्रोत्साहित करने की जरूरत है। - सूरजवीर पहलवान, पिता दिव्या काकरान