प्राचीन संस्कृति को संजो रखा है दिलों में
मोरना। कस्बा भोकरहेड़ी में होली की संस्कृति को कई दशकों से युवा और बुजुर्गों ने सजोकर रखा हुआ है। होली के पावन पर्व पर हमारी प्राचीन संस्कृति की विरासत को संभालकर आज भी जिंदा करने का कार्य दिन रात ढोल बजाने के हुनर को तराशने के लिए ग्रामीण प्रैक्टिस करने में लगे रहते हैं। महीनों होली के पावन पर्व का लुत्फ उठाने, त्योहार को जोरदार और शानदार बनाने के लिए कड़ी मशक्कत की जाती है। इस दौरान शानदार नृत्य कर समा बंध जाने पर ग्रामीण खुशी से झूमकर नाचने लगते हैं। होली के इस मनोरंजन में महिलाएं, युवतियां छतों पर खड़े होकर इस पर्व का आनंद उठाने का कोई मौका नहीं चूकती हैं।
कस्बा भोकरहेड़ी के लोग अंग्रेजी शासनकाल से पहले से करीब 300 वर्षों से होली के पर्व को बड़े धूमधाम से मनाते चले आ रहे हैं। होली को लेकर कस्बे मेें अनेकों स्थानों पर काफी संख्या में ढोलिया जब ढोल रात के समय बजाते और गाते हैं, तो हर कोई व्यक्ति इसमें शामिल होने की इच्छा को दबा नहीं पाता। बुजुर्गों के सानिध्य में दर्जनों युवा ढोल बजाने की परंपरा को तत्परता से सीखते दिखाई देते हैं। मास्टर चंद्रपाल, रामपाल सहरावत, भाकियू नगर अध्यक्ष उदयवीर सिंह ने बताया कि पुराने जमाने में करीब दो माह पहले से कस्बे की गलियों, चौराहों पर होली के ढोलिया और गायक प्रैक्टिस में लग जाते थे। समय के बदलाव के साथ-साथ होली की तैयारी हाल में करीब 20 दिन पहले से की होने लगती है, जिसमें महक सिंह, विरेंद्र, जगपाल, रामपाल, उदयबीर सिंह, मनोज आदि सहित होली गायक विरेंद्र, पप्पू, देवपाल आदि अपनी गायकी को तराशते हैं। झांझ पर रणबीर सिंह, जगपाल, देवेंद्र के साथ कागज के बनाए गए घोड़े के साथ बिट्टू शक्तिमान का नृत्य माहौल को सुंदर बना देता है। वहीं, मोहल्ला लक्कूपुरा मेें जितेंद्र, प्रमोद, शुभम, प्रवीण आदि ढोलिया, सुक्का,अशोक राजबीर गायक और कुलदीप नृत्य कर सभी का मन मोह लेने का हुनर जानते हैं।
होली के छंद हिंदुस्तान में सैकड़ों वर्षों से गाए जाते हैं
मोरना। कस्बा निवासी रामपाल नेताजी ने बताया कि बेहड़ा सादात निवासी रामशरण शर्मा के होली छंद हिंदुस्तान में सैकड़ों वर्षों से गाए जा रहे है। कंवर निहाल दे, लक्ष्मण मूर्छा, सलोचना सती, उषा अनिरुद्ध, राजा मोरधज, राजा हरिचंद्र, जाटों का इतिहास, पुष्कर स्नान आदि होली के किस्से होली के पर्व पर कस्बों, गांव की गलियों में गाए जाते हैं। महाभारत के किस्से के एक-एक शब्दों को बेहतरीन तरीकों से छंदों में सरलता से पिरोकर इन्होंने भारतीय प्राचीन परंपराओं को सजोने का काम कर हम सबको अपना आशीर्वाद देने का काम किया है।