मेहनत के बल पर मिली कामयाबी की ऊंचाइयां
मुजफ्फरनगर। खेतीबाड़ी के परिवेश में खुद के आईएएस बनने की चाहत बचपन में ही किसान पिता की आंखों में देखी थी। दृढ़ संकल्प और एकाग्र चित मन से न केवल ये सपना पूरा किया, बल्कि रिजल्ट ने अचंभित कर दिया। यूपीएससी वर्ष 2019 के एग्जाम टॉपर प्रदीप सिंह की ये बातें उनकी कामयाबी के पीछे छिपी प्रेरणा की साक्षी है।
आईएएस परीक्षा में प्रथम स्थान पाने वाले प्रदीप सिंह को सिसौली के किसान भवन में विशिष्ट उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया है। यूपीएससी टॉपर ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि सफलता उतना नहीं सिखाती, जितना विफलता सिखाती है। बीते वर्ष 260 वीं रैंक मिली थी, मगर अबकी बार फर्स्ट रैंक आई। खुद ‘सरप्राइज’ हो गया। ये चौथा प्रयास था। जल्दी सफलता में वो वजह पता नहीं चलती, जहां आप कमजोर हैं। विफलता के बाद हम वो कारण सुधारते हैं, जहां गलतियां हुई है। लगातार मेहनत की, लगन नहीं छोड़ी। एग्जाम में उम्मीद थी आईएएस मिल जाएगा, मगर टॉपर बनना अचंभित कर गया। सोनीपत के दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में बीटेक के उपरांत प्रदीप सिंह वर्ष 2015 में दिल्ली में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर बन गए थे, मगर उन्हें अपने पिता का बेटे को आईएएस बनाने का ख्वाब याद रहा। उन्होंने कोशिश की, लेकिन दो बार वे प्रारंभिक परीक्षा भी क्वालीफाई नहीं कर पाए। उसके बाद कमजोरियों पर मंथन किया और नई तैयारी से फोकस किया। बीते वर्ष आईआरएस मिल गया। फरीदाबाद में ट्रेनिंग से छुट्टी ली और फिर लक्ष्य पाने को डट गए। अब वह देश की सुर्खियों में है। कहते है कि आईएएस एग्जाम में प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू तीनों ही चरण महत्वपूर्ण है। तीनों स्टेप यूनिक है और अलग विविधता से भरें है। निरंतर अभ्यास ही सफलता की राह बनाता है।
गांव के सरकारी स्कूल में सातवीं तक पढ़े
हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव तेवरी के मूल निवासी प्रदीप सिंह के किसान पिता सुखबीर सिंह मलिक पूर्व सरपंच है। माता शीला देवी गृहिणी हैं। परिवार में उनके अलावा बड़ा भाई अजीत सिंह व छोटी बहन मनीषा है। सातवीं तक गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। उसके बाद शंभु दयाल मॉर्डर्न स्कूल, सोनीपत में बारहवीं तक सीबीएसई के स्टूडेंट रहे।
आईएएस की तैयारी के प्रदीप सिंह के टिप्स
पढ़ाई को घंटे के हिसाब से तय मत कीजिए। क्या पढ़ना है, उसका वीकली प्लान बनाए और पूरी गहनता से पढ़ें।
- टाइम मैनेजमेंट किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति का मूलमंत्र है। समय प्रबंधन से ही विषयों की पढ़ाई का वीकली प्लान पूरा हो पाएगा।
- आईएएस टेस्ट सीरीज उसी तरह कीमती है, जैसे क्रिकेट में टेस्ट मैच से पूर्व प्रैक्टिस मैच। खिलाड़ी पिच, आउट फील्ड का अनुभव बखूबी कर लेता है। वैसे ही टेस्ट सीरीज के अभ्यास के दौरान गलतियों का पता चलता है।
- नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ कर सकते हैं। आफिस जाते वक्त तथा लंच के बाद यानि जब वक्त मिले, पढ़ाई पर ध्यान रखें।
- एग्जाम की तैयारी में परिवार, दोस्त और शिक्षकों की भूमिका अहम होती है। सकारात्मक माहौल और अपनों का प्रोत्साहन मानसिक मजबूत बनाता है। उनके टॉपर बनने सभी का प्रेरक सहयोग मिला।
वैज्ञानिक खेती से जीवन स्तर सुधरे किसान: प्रदीप
मुजफ्फरनगर। आईएएस टॉपर प्रदीप सिंह कहते हैं कि वेस्ट यूपी उपजाऊ क्षेत्र है। गन्ना और गेहूं मुख्य पैदावार है। किसान वैज्ञानिक तौर-तरीके खेती में अपनाए तो उत्पादन बढ़ोत्तरी के साथ मुनाफा बढ़ेगा। किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा, तभी उनके बच्चे शिक्षा क्षेत्र में ऊंचाइयां हासिल कर पाएंगे। सिविल सर्विस के दौरान किसानों और ग्रामीणों के उत्थान के लिए नई योजनाओं पर काम करने का ध्येय रहेगा।