मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड की गायब मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी को साक्ष्य मानने को लेकर शनिवार को सुनवाई होगी।
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया।
आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
सीबीआई बनाम राधा मोहन की पत्रावली में मूल दस्तावेज गुम होने की स्थिति में फोटोकॉपी को साक्ष्य मानने को लेकर अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या नौ में शनिवार को सुनवाई होगी। ब्यूरो