मुजफ्फरनगर। कानपुर में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाला कुख्यात विकास दुबे शासन की हिटलिस्ट में है, लेकिन जनपद में भी ऐसे शातिर हैं जो राजनीति की आड़ लेकर पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसा ही शातिर अपराधी है दो लाख का इनामी हरीश भौरा, जिसे पिछले आठ साल से जनपद पुलिस लाख प्रयासों के बावजूद तलाशना तो दूर, उसकी भनक तक नहीं पा सकी है।
भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव भौराखुर्द निवासी हरीश का क्षेत्र में जबरदस्त आतंक है। वर्ष 2004 में गांव में ही रंजिश के चलते हत्या की पहली वारदात को अंजाम देने वाला हरीश इसके बाद लगातार अपराध की सीढ़ियां चढ़ता गया और वर्तमान में उसके खिलाफ हत्या, लूट, अपहरण जैसे 24 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। हरीश के इस आपराधिक सफर में उसके भाई आदेश ने भी भरपूर साथ दिया और एक समय दोनों भाइयों का इतना आतंक रहा कि भौराखुर्द गांव को खूनी भौरा के नाम से जाना जाने लगा। दोनों भाइयों के आतंक के चलते भौराखुर्द से बड़ी संख्या में ग्रामीण पलायन के लिए मजबूर हुए, लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते पुलिस दोनों भाइयों पर हाथ नहीं डाल सकी। हालांकि लंबे समय तक फरार रहे एक लाख के इनामी आदेश को करीब डेढ़ साल पूर्व पुलिस ने जानसठ क्षेत्र में मुठभेड़ में मार गिराया था, लेकिन दो लाख का इनामी हरीश भौरा आज तक पुलिस पकड़ से दूर है। हरीश भौरा के साथ उसका साथी बड़ौत से 25 हजार का इनामी राहुल निवासी सिसौली भी करीब आठ साल से ही फरारी काट रहा है।
हरीश भौरा आठ साल से फरार है, जिसकी तलाश के लिए नए सिरे से टीम का गठन किया जा रहा है। उसके गिरोह के सदस्यों को भी चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। - अभिषेक यादव, एसएसपी