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पलक झपकते ही खुशियां हो गईं काफूर

Sun, 30 Apr 2017 01:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मौत के बाद जिला अस्पताल में विलाप करते परिजन। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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क्रिकेट कोच विकास शर्मा की मौत उनका इंतजार कर रही थी। रास्ते में रिश्तेदारों के रोकने पर भी वह नहीं रुके और घर जाने की जिद कर बैठे। छपार थाने में नेशनल हाईवे पर कार डिवाइडर से टकराई और परिवार के तीन लोग मौत की नींद सो गए।
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पलक झपकते ही खुशियां काफूर हो गई। घायल शिक्षिका पत्नी की दिल्ली में हालत चिंताजनक।  चिकित्सकों के मुताबिक महिला की धड़कनें चल रही है, लेकिन उसका दिमाग काम नहीं कर रहा है। चिकित्सकों के एक पैनल ने उसकी जांच की।      
          
जनपद के क्रिकेट कोच विकास शर्मा खुद तो क्रिकेट के कोच थे, पत्नी स्वाति शर्मा शहर के एमजी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका हैं। शुक्रवार शाम विकास देहरादून से शादी में शामिल होने के बाद बहन मंजू, ममेरे भाई संजय, पत्नी और नौ वर्ष के बेटे केशव के साथ कार से घर के लिए चले।
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रास्ते में बिहारीगढ़ में रिश्तेदारी में रुके, तो रिश्तेदारों ने रात होने की बात कहकर रोकने का प्रयास किया। हालांकि विकास ने रुकने से इंकार कर दिया। रिश्तेदारों और उनके परिवार के सदस्यों को जैसे ही घटना का पता चला तो साकेत स्थित घर पर कोहराम मच गया।

महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। क्रिकेट के गुर सीखने वाले सैकड़ों शिष्य कोच के घर के बाहर और स्टेडियम में जुटने लगे। शिष्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। एमजी पब्लिक स्कूल के स्टाफ को हादसे की जानकारी मिली तो प्रार्थना सभा में स्वाति के साथ की शिक्षिकाएं और बच्चे भी रोने लगे। मोहल्ले में भी गमगीन माहौल हो गया।  
                
वहीं, जिस स्विफ्ट कार के डिवाइडर से टकराने पर कोच विकास शर्मा की मौत हुई है। इस कार को उन्होंने एक वर्ष पूर्व ही बड़े शौक से खरीदा था। अपनी कार का कोच बहुत ध्यान रखते थे। उधर,  एमजी पब्लिक स्कूल की प्रार्थना सभा में जैसे ही हादसे की सूचना शिक्षकों और बच्चों को दी गई। स्वाति शर्मा जिन कक्षाओं में पढ़ाती हैं, उन कक्षाओं के बच्चे भी अपने आंसुओं को नहीं रोक सके। सभा करने के तुरंत बाद स्कूल की छुट्टी कर दी गई।             

शीशे में बंद केशव चिल्लाता रहा      
शुक्रवार तड़के तीन बजे कोच की कार डिवाइडर और पुलिया से टकराने के बाद कार में सवार कोच, पत्नी, बहन और ममेरे भाई सभी लहूलुहान होकर बेहोश हो गए। कार में सो रहे कोच के बेटे नौ साल के मासूम केशव की आंखें खुली तो वह कुछ नहीं समझ पाया। हाइवे पर आसपास से सैकड़ों वाहन गुजर रहे थे, लेकिन अंधेरा होने के कोई सहायता के लिए नहीं रुक रहा था। ऐसे में मासूम ने चिल्लाना शुरू किया तो कार के शीशे बंद होने के कारण  आवाज बाहर नहीं जा पाई।

मासूम ने बहादुरी दिखाते हुए कार के शीशों पर जोर-जोर से हाथ मारने शुुुरू कर दिए, तभी किसी कार सवार युवक की नजर बच्चे पर पड़ी। उसने अपनी कार रोकी और पुलिस कंट्रोल रूम को घटना की जानकारी दी। कुछ देर बाद छपार पुलिस मौके पर पहुंची। सबसे पहले मासूम केशव को बाहर निकाला और बाद में सभी घायलों को अस्पताल भिजवाया।     

मेहनती था कोच        
क्रिकेट कोच विकास शर्मा और उनकी पत्नी स्वाति शर्मा दोनों काफी मेहनती थे। सुबह से शाम तक अपने कामों में व्यस्त रहने वाला दंपति काफी विनम्र स्वभाव के थे। बहन मंजू देवी भी वर्षों से इनके ही साथ रहती थी। मेरठ के कैथवाड़ी निवासी लेखपाल रामकुमार शर्मा वर्षों पूर्व साकेत कालोनी में मकान बनाकर रहने लगे थे।

इन्हीं के पांच बच्चों में तीन बहनों और दो भाइयों में कोच विकास चौथे नंबर के थे। वर्षों पहले माता-पिता की मौत के बाद विकास साकेत कालोनी में परिवार के साथ रहते थे। बड़े भाई अशोक देहरादून में रहते हैं। उनकी बहन भावना, बहन मंजू देवी, विकास शर्मा और सबसे छोटी बहन आरती थे। ससुराल से विवाद के चलते बहन मंजू देवी वर्षों से साथ ही रहती थी।

विकास खुुद को फिट रखने के लिए रोजाना जिम जाते थे। उसके बाद स्टेडियम फिर प्राइवेट कॉलेज में खेल कोच और शाम को फिर स्टेडियम में पूरे दिन व्यस्त रहना ही कोच की दिनचर्या का हिस्सा था। उधर, पत्नी स्वाति सुबह शहर के कालेज में पढ़ाने जाती थी तो शाम को घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। दंपति पूरे दिन व्यस्त रहता था।             
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