अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र में छह साल पहले नाबालिग बेटी के यौन उत्पीड़न मामले में अदालत ने दोषी पिता साबिर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वादी मां और पीड़िता पक्षद्रोही हो गई लेकिन एफएसएल रिपोर्ट सजा का आधार बनीं।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने फैसले में लिखा कि एक पिता की ओर से नाबालिग पुत्री का शारीरिक और मानसिक शोषण ऐसा कृत्य है जो मानव सभ्यता को कलंकित करता है।
मुकदमे की वादी मां 15 दिसंबर 2020 को मायके से घर लौटी थीं। नाबालिग बेटी ने जानकारी दी कि पिता ने उसका यौन उत्पीड़न किया है।
इसके बाद कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया और आरोपपत्र दाखिल किया। प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 में हुई। जिरह के दौरान वादी और पीड़िता पक्षद्रोही हो गईं।
ऐसे में अदालत ने फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी से कराई गई मेडिकल रिपोर्ट महत्वपूर्ण साबित हुई। अदालत ने मेडिकल तथ्यों को पुष्ट पाते हुए दोषी को आजीवन कारावास और 53 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। यह भी स्पष्ट किया गया कि आजीवन कारावास से मतलब शेष प्राकृतिक जीवन काल के लिए है।