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युवक की हत्या में आरोपी गार्ड दोषमुक्त

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युवक की हत्या में आरोपी गार्ड दोषमुक्त
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मुजफ्फरनगर। दक्षिणी कृष्णापुरी निवासी युवक की गोली लगने से हुई मौत के मामले में एडीजे-17 कोर्ट ने आरोपी कॉलेज के गार्ड अमरजीत सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। घटना के बाद से ही जेल में बंद आरोपी को न्यायाधीश ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र दाखिल करने पर रिहा किए जाने के निर्देश दिए हैं।
शहर के मोहल्ला दक्षिणी कृष्णापुरी निवासी ऋषभ सिंघल अपने तयेरे भाई शिवम व दोस्त मधुर वर्मा के साथ छह नवंबर 2018 को दीवाली की रात बाइक पर किसी काम से विश्वकर्मा चौक पर गया था। देर रात वहां से लौटते हुए एक कॉलेज गेट के बाहर ऋषभ सिंघल की गर्दन में गोली लग गई थी, जिसे जिला अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। ऋषभ के तयेरे भाई शिवम गुप्ता ने कॉलेज के गार्ड बचनसिंह कॉलोनी निवासी अमरजीत सिंह पर गोली मारने का आरोप लगाते हुए नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नई मंडी थाना पुलिस ने आरोपी अमरजीत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, तभी से वह जेल में बंद था। आरोपी अमरजीत के अधिवक्ता संजय सिंह व शशिप्रभा सिंह ने बताया कि मामले की सुनवाई एडीजे-17 कोर्ट में न्यायाधीश अंकुर शर्मा के समक्ष हुई। इसमें अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश किए गए, लेकिन अभियोजन आरोपी गार्ड अमरजीत के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा। अधिवक्ता संजय सिंह व शशिप्रभा ने बताया कि मंगलवार को न्यायाधीश ने अमरजीत को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करते हुए उसे 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र दाखिल करने पर जेल से रिहा किए जाने के आदेश दिए हैं।
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पक्षद्रोही हो गए चश्मदीद
मुजफ्फरनगर। दिवाली की रात हुए ऋषभ सिंघल हत्याकांड में मुकदमे का वादी व चश्मदीद गवाह शिवम गुप्ता पक्षद्रोही हो गया। अधिवक्ता संजय सिंह ने बताया कि कोर्ट में शिवम ने बयान दिए कि उसने ऋषभ को गोली लगते हुए नहीं देेखा। इसके बाद विवेचक ने उसके किसी तरह के बयान भी नहीं लिए। इसके साथ ही अभियोजन द्वारा पेश किए गए अन्य गवाहों शुभम, अर्जुन व विकास ने भी घटना की पुष्टि नहीं की, जिसके चलते इन सभी को पक्षद्रोही घोषित कर दिया गया। वहीं, पुलिस द्वारा घटना के बाद कॉलेज में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की सीडी कोर्ट में पेश की। अधिवक्ता संजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने उक्त सीडी की न तो फर्द तैयार की और न ही उसे जांच के लिए एफएसएल भेजा गया। उक्त सीडी कोर्ट में चल भी नहीं पाई। यहां तक कि पुलिस आरोपी गार्ड से आला-ए-कत्ल तमंचे की बरामदगी भी साबित नहीं कर पाई।
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