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नोटबंदी ने दिलाई दूल्हे को रिहाई, तय रकम 31 जनवरी को देने पर सहमति

Thu, 22 Dec 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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बैंक में नौकरी बताकर शादी रचाने वाले दूल्हे को शाहपुर के गांव गोयला से तीन दिन बाद रिहाई मिल सकी। मंगलवार को पंचायत में तय हुए रुपयों का इंतजाम करने के लिए दूल्हे को मोहलत मिली थी, लेकिन नोटबंदी की वजह से रुपयों का इंतजाम नहीं हो पाया। लड़की पक्ष ने फिर से उन्हें बंधक बना लिया। बुधवार देर रात फिर पंचायत हुई, जिसमें 31 जनवरी तक रुपये देने की बात तय होने पर दूल्हे और उसके परिजनों को छोड़ दिया गया।
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शाहपुर के गांव गोयला में बागपत के गांव निनाना के युवक की गत 18 दिसंबर को शादी हुई थी। लड़की वालों को रिश्तेदारों ने बताया था कि लड़का पीएनबी में क्लर्क है, लेकिन शादी के अगले ही दिन लड़की पक्ष को पता चला कि लड़के की नौकरी नहीं है। पता चलने पर परिजनों ने लड़की को अगले ही दिन अपने घर लड़की मिलाने के लिए बुलवा लिया। 19 दिसंबर को दूल्हा अन्य रिश्तेदारों के साथ देर शाम पहुंचा तो उनसे पूछताछ शुरू हुई।

नौकरी नहीं होने की सूचना सही मिली। इस मामले में लड़का पक्ष के जिम्मेदार लोगों का जमावड़ा गोयला में लग गया। 20 दिसंबर को देर रात तक चली पंचायत में दोनों पक्ष के लोगों ने साढ़े सोलह लाख रुपये लड़की पक्ष को देने तय किए थे। देर रात दूल्हे एवं उसके रिश्तेदारों को बंधनमुक्त किया, लेकिन रुपये आने तक दूल्हे, उसके पिता और बिचौलिए को गांव में ही रख लिया। बुधवार सुबह रुपये लाने की जिम्मेदारी लेने वाले लोगों ने रुपयों का इंतजाम होने से इंकार कर दिया तो दूल्हे सहित अन्य को पुन: बंधक बना लिया गया।
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बुधवार को फिर से बागपत के गांव निनाना और आसपास से आए जिम्मेदार लोगों के बीच पंचायत हुई, जिसमें देर रात दोनों पक्ष के बीच सहमति बनी कि नोटबंदी की वजह से अभी रुपयों का इंतजाम नहीं हो सकता तो 31 जनवरी तक तय हुए साढ़े सोलह लाख रुपये दिए जाएंगे। इस बात पर कमरे में बंद दूल्हे और अन्य को छोड़ने की बात हुई।

जैसे ही इन लोगों को बाहर लाने लगे तो लोगों ने हंगामा कर दिया। दूल्हे पक्ष के लोगों को पीटने पर उतारू हो गए। इसके साथ ही फैसला करने वालों का भी विरोध हो गया। घंटों बाद मामला शांत हुआ और दूल्हे सहित उसके अन्य रिश्तेदारों को बाहर निकालकर भेजा गया। तीन दिन चले इस प्रकरण में पुलिस को किसी पक्ष ने सूचना नहीं दी।
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