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मुस्लिम पर्सनल लॉ के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही सरकार: उलमा

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मौलाना अबुल कासिम नोमानी - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। मोदी सरकार द्वारा एक बार फिर से लोकसभा में तीन तलाक बिल पेश किए जाने के मामले में विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम समेत उलमा ने दो टूक कहा कि सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन कर रही है। सरकार धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाए बिल की खामियां को दूर करें।
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इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि तीन तलाक बिल को सरकार बार बार लोकसभा में पेश कर शरीयत में खुली दखल अंदाजी कर रही है। जबकि भारतीय संविधान ने सभी को अपने धर्म के मुताबिक जिंदगी जीने का पूरा अधिकार दिया है। मौलाना बनारसी ने कहा कि तलाक-ए-बिदद्त गलत है, यह हम मानते हैं, लेकिन सरकार जिस तरीके से बिल को पास कराने के लिए नए नए तरीके ला रही है, वो सरासर गलत और शरीयत के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक मामलों में दखल अंदाजी करने के बजाए सरकार देशभर के उलमा से राय मशविरा करके बिल को लागू कराए।
जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि सरकार हठधर्मी पर अड़ी है, इसके चलते वह बार बार तीन तलाक बिल को संसद में पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार तीन तलाक बिल को छोड़कर मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था क्यों नहीं करती है। फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि जब देशभर से यह आवाज उठ रही है कि बिल को पेश करने से पहले मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उलमा से इस मामले में बात की जाए तो सरकार इस मानने के बजाए केवल बिल को पारित कराने पर अड़ी हुई है। इससे साफ है कि केंद्र सरकार मुसलमानों के मजहबी मामलों में खुली दखल अंदाजी कर रही है।

मुफ्ती अरशद फारूकी- फोटो : DEVBAND

कारी इस्हाक गोरा- फोटो : DEVBAND

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