मुजफ्फरनगर। जिले में लोहा उद्योग इस समय संकट से गुजर रहा है। लोहा उद्योग से जुड़े उद्यमियों की मांग है कि बजट में सरकार कच्चे माल की खरीद पर जीएसटी घटाने की घोषणा करे।
पेपर उद्योग में कच्चे माल पर पांच प्रतिशत जीएसटी है और लोहा उद्योग पर यह 18 प्रतिशत है। पूरे देश में बिजली की अलग-अलग दरे हैं। लोहा उद्योग में बिजली की खपत ज्यादा है, बिजली के रेट कम होने से उत्पाद पर खर्च कम हो जाता है। पूरे देश में विद्युत दरों का एक ही मूल्य होना चाहिए, जिससे फैक्टरी मालिक को उत्पाद की बिक्री में समस्या का सामना न करना पड़ेे।
जिले में लोहा उद्योग से जुड़े भीमसेन कंसल का कहना है कि लोहा उद्योग के सामने इस समय सबसे बड़ी समस्या कच्चे माल की महंगाई है। पेपर उद्योग में कच्चे माल पर पांच प्रतिशत जीएसटी है और लोहा उद्योग पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। कंसल का कहना है कि लोहा उद्योग में बिजली की खपत अधिक होती है। विद्युत दरों में अंतर से फैक्टरी मालिकों के सामने समस्या पैदा होती है। पूरे देश विद्युत दरें एक होनी चाहिए।
लोहा उद्यमी अनिल तायल का कहना है कि सरकार को कच्चे माल की खरीद पर जीएसटी घटानी चाहिए। जो फैक्टरी मालिक कच्चा माल खरीदते हैं और बैंक के माध्यम से पारदर्शी तरीके से भुगतान करते हैं, जीएसटी के अधिकारी उन्हें भी परेशान करते है। ये व्यवस्था बंद होनी चाहिए। सरकार जिस तरह कुछ ही फैक्टरी से सरिया खरीदती है, उसमें हम लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए। सरकारी खरीद से डिमांड बढे़गी।
लोहा उद्योग की समस्या
- कच्चे माल की खरीद पर जीएसटी 18 प्रतिशत।
- कच्चा माल लगातार मंहगा होता जा रहा है।
- सरकारी कंपनी केवल कुछ फैक्टरियों से माल खरीदती है।
- दूसरे प्रदेशों की तरह बिजली की दरें कम होनी चाहिए।
लोहा उद्योग की मांग
- सरकार पूरे देश बिजली की दरें एक करें।
- पेपर की तरह जीएसटी पांच प्रतिशत हो।
- मांग के लिए सरकार लोहे की खरीदारी करें।
- उद्यमियों को जीएसटी के अधिकारी बिना वजह परेशान न करें।