रोडवेज बस स्टैडं पर बैठे महाराष्ट्र से गृह जनपद मुजफ्फरनगर लौटे श्रमिक ।
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तीन दिन में खत्म हो जाता था सरकारी राशन
मुजफ्फरनगर। कोल्हू एक माह पहले बंद हो गए। राशन भी खत्म हो गया। सरकार से जो राशन मिलता था, वह तीन दिन में खत्म हो जाता था। सरकार के भरोसे कब तक ठहर सकते थे, इसलिए जैसे-तैसे करके अपने जिले में लौट आए। महाराष्ट्र में रहकर कोल्हुओं पर काम करने वाले चरथावल क्षेत्र के श्रमिक जब मुजफ्फरनगर पहुंचे तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
ये लोग परिवार की महिलाओं और बच्चों के साथ सर्दियों की शुरुआत में महाराष्ट्र चले जाते हैं और मार्च तक लौट आते हैं। चरथावल के कुलदीप ने बताया कि वहां मजदूरी ज्यादा मिल जाती है। सर्दी कम पड़ती है इसलिए रात-दिन काम करते हैं। पूरा परिवार काम करता है तो आमदनी भी अच्छी हो जाती है। मुनेश, सूरजमल, जोगेंद्र एवं पिंटू आदि ने बताया कि उन्होंने अपने घर आने के लिए सरकारी विभागों में अपने नाम लिखवा रखे थे। वहां के प्रशासन ने बसें लगाकर उन्हें यहां भिजवा दिया। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में एक महीना लग गया। अब वे कभी भी अपना जिला छोड़कर नहीं जाना चाहते हैं। इन सभी को पुलिस ने क्वारंटीन सेंटर भेज दिया है।
24 जिलों के 114 श्रमिकों को भेजा
मुजफ्फरनगर। जिले के क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे 114 श्रमिकों को क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद उनके जिलों को भेज दिया गया। इसमें 24 जिलों के श्रमिक शामिल हैं। एडीएम वित्त आलोक कुमार ने बताया कि इन सभी को बसों से उनके गृह जनपदों को भेज दिया है।