मजदूरों की व्यवस्था करने में नाकाम हुई सरकार
मुजफ्फरनगर। विपक्षी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने की सरकार की कोई पॉलिसी नहीं थी। केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने इन मजदूरों की मजबूरी को नहीं समझा। लाखों मजदूर अपने परिवार के साथ तपती धूप में सड़क पर पैदल चलने को मजबूर हैं।
सपा के युवा नेता चंदन चौहान का कहना है कि मजदूरों के साथ जो कुछ हो रहा है, इसे देखकर मानवता भी शर्मसार हो रही है। आरोप लगाया कि पुलिस ने मजदूरों की साइकिल छीनकर बेच दी। पता नहीं किन परिस्थितियों में उन्होंने साइकिल खरीदी होगी। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और सरकार को संवेदनशील होना चाहिए।
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व मंत्री दीपक कुमार का कहना है कि मजदूरों के साथ ऐसा अन्याय कभी नहीं हुआ होगा। रेलवे लाईन पर चले तो मौत, सड़क पर चले तो मौत, मुख्य रास्ते से चले तो पुलिस के डंडे। रालोद नेता सुधीर भारतीय का कहना है कि सरकार ने मजदूरों को गंभीरता से लिया ही नहीं। देश में किसान और मजदूर सरकार के एजेंडे में नहीं है। सरकार को मजदूरों की चिंता होती तो लॉकडाउन के पहले दिन से ही इन्हें लेकर कोई न कोई नीति बनाई गई होती। बसपा नेता जियाउर्रहमान का कहना है कि देश के विकास में नींव की ईंट मजदूर ही हैं। देश के समस्त छोटे-बड़े उद्योग ये मजदूर ही चला रहे हैं। सरकार को इन्हें लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत हैं।