बांदा से की गई है भेड़ की आपूर्ति
जालौनी नस्ल की भेड़ की आपूर्ति बुंदेलखंड नेचुरलस नामक संस्था ने बुंदेलखंड के बांदा से की है। यहां की नस्ल अधिक गर्मी के मौसम में रहने, अधिक ऊन के लिए अपनी पहचान रखती है।
पालक को विभाग देता है सब्सिड़ी
बुधवार को राजपुर छाजपुर और सरनावली पहुंची पशुपालन विभाग की टीम ने केंद्रों का निरीक्षण किया। जालौनी नस्ल की जानकारी भेड़ पालकों को दी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र गुप्ता ने बताया कि सरकार की ओर से एक सेंटर पर एक लाख 70 हजार रुपये दिए जाते हैं, जिनमें से पशुपालक को केवल 17 हजार रुपये ही देने होते हैं।
एक थी मुजफ्फरनगरी भेड़
गुड़ और गन्ने के उत्पादन से खास पहचान रखने वाले जिले की भेड़ का भी विशेष स्थान था। नस्ल को मुजफ्फरनगरी भेड़ नाम दिया गया था। ऊन उत्पादन के शौकीनों की यह खास पसंद थी।
पिछले वर्ष आयोजित पशु मेले में भी इस भेड़ का प्रदर्शन किया गया था। लेकिन इस बार किसी भी जिले को यहां की भेड़ नस्ल सुधार के लिए नहीं भेजी गई है। सीवीओ का कहना है कि जिले में बिक्री करने वाली कोई संस्था पंजीकृत नहीं है, जबकि शासन के निर्देश थे कि पंजीकृत संस्था से ही भेड़ का आदान प्रदान किया जाना है।