फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परमात्मा को किसी भी चीज की आवश्यकता नहीं : आचार्य वीरेंद्र

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो समाचार
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। आचार्य वीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि परमात्मा किसी भी वस्तु के भूखे नहीं होते, क्योंकि संसार का प्रत्येक पदार्थ उन्हें स्वयं ही प्राप्त है। परमात्मा को किसी भी चीज की आवश्यकता नहीं होती है।
आर्य समाज शिवपुरी के कार्यक्रम के दूसरे दिन आचार्य ने कहा कि जब मन सांसारिक वस्तुओं में लगता है तो वह वासना बन जाते हैं। जब ईश्वर में लगता है तो वह उपासना हो जाती है। दुख का कारण जन्म है, इसलिए ऐसा प्रयास करें कि जन्म-मरण से मुक्ति मिल जाए। मनुष्य यह सोच कर कार्य करे कि यह वस्तु संपत्ति आदि मेरी नहीं है। बल्कि यह परमात्मा ने मेरे लिए दी है। आविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, अभी निवेश यह पांच प्रकार के क्लेश हैं। इन क्लेशों को शांत करने के लिए मनुष्य को हर समय प्रयत्न करना चाहिए। अभिमान, प्रमाद, पागल, थका हुआ, क्रोधी, भूखा, भयभीत कामी ये 10 अवगुणों से मनुष्य का पतन हो जाता है।
विज्ञापन

यही बात ऋषि वेदव्यास ने धृतराष्ट्र को समझाते हुए कहा था कि दुर्योधन को समझाइए उसमें यह 10 अवगुण हैं, लेकिन उन्होंने नहीं माना और इसी कारण से दुर्योधन का पतन हुआ। इससे पूर्व विमल प्रकाश के आवास पर यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें विपुल व मित्सी यजमान रहे। कार्यक्रम में जगदीश सिंह, अजेश आर्य, सुरेश आर्य, भगवान सिंह शामिल रहे।
विज्ञापन

आर्य भजन उपदेशक नरेश निर्मल, महाशय जगमाल सिंह, सुकीर्ति आर्य ने ईश्वर एवं राष्ट्रभक्ति के गीत सुनाए। यज पंडित रामदेव शास्त्री ने किया। अध्यक्षता अशोक शर्मा और संचालन आर्य समाज के जिला प्रधान सत्येंद्र आर्य ने किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें