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जड़वड़ के बाद ढ़ासरी में गैस और तेल के भंडार की खोज    

Sat, 21 Jul 2018 12:24 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
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जंगल में बोरिंग करते कंपनी के कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला
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जानसठ गांव जड़वड़ के बाद अब गांव ढ़ासरी के भूगर्भ में तेल और प्राकृतिक गैस व तेल के भंडार की खोज के लिए दक्षिण भारत की कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने 200 फुट गहरा बोरिंग किया। टीम के अधिकारियों ने बोरिंग में डेटोनेटर से ब्लास्ट कर धरती में आने वाले कंपन को आंका। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक अब प्रति तीन किमी की दूरी पर इसी तरह के 200 फुट गहरे जमीन में बोरिंग किए जाएंगे।  
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तहसील जानसठ के गांव ढ़ासरी के जंगल में शुक्रवार को किसान  तेजपाल पुत्र मूले के खेत में प्राकृतिक गैस और तेल के भंडार जांच के लिए दक्षिण भारत की कंपनी जेईओ 8क-आई के अधिकारियों ने कर्मचारियों से बोरिंग कराया। कंपनी के पीआरओ कोऑर्डिनेटर हुकुम सिंह राठौर ने बताया कि अभी यह 2डी सेशन का कार्य चल रहा है।

जिसकी रिपोर्ट देहरादून ओएनजीसी लैब को भेजी जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद 3डी सेशन पर कार्य चलेगा। जिसमें ऐसे बोरिंग तीन किलोमीटर की दूरी पर 200 फुट गहरे भूगर्भ में किए जाएंगे। इस कार्य के लिए पहले जनपद के जिलाधिकारी से परमीशन लेनी होगी।
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उसके बाद इस क्षेत्र में गैस व तेल होने की पुष्टि की जांच कार्य शुरू होगी। गांव ढ़ासरी में भूगर्भ बोरिंग में डेटोनेटर की छड़े डालकर ब्लास्ट किया। कंपनी की टीम के एक्सक्लूसिव शूटर टी मोहन के साथ जेई ओपन ऑब्रर्जवर मोहन कुमार, पीआरओ डीकेश शेखावत ने ब्लास्ट कर धरती के कंपन की क्षमता आंकी तथा उसकी रिपोर्ट तैयारी की।

किसान और प्रधान को नहीं दी गई जानकारी
किसान तेजपाल ने बताया कि 20-25 वर्ष पूर्व उनके खेतों में अधिकारियों ने सर्वे कर तेल व गैस होने की उनको बात बताई थी। परंतु आज जब टीम बोरिंग करने के लिए आई, तो हमें इसकी सूचना नहीं दी गई। अन्य पड़ोसी किसानों से उसको जानकारी मिली।

खेत पर जाकर देखा तो वहां पर काम करने वाले मजदूरों के साथ फसल का नुकसान होने को लेकर उसकी झड़प हो गई थी। मजदूरों ने कंपनी के अधिकारियों से बातचीत करने को कह दिया। मौके पर मौजूद कंपनी के अधिकारियों से उसकी बातचीत हुई।

अधिकारियों ने उसको आश्वस्त किया कि उनकी नुकसान फसल का मुआवजा दिलाया जाएगा। इसके बाद किसान शांत हुआ था। ग्राम प्रधान अशोक कुमार ने बताया कि उनको भी कंपनी की टीम द्वारा किसान में बोरिंग करने की सूचना नहीं दी गई। ग्रामीणों ने फोन पर उनको जानकारी दी थी।
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