तीर्थनगरी शुक्रताल में गंगा की मुख्य धारा को लाने के प्रयास आरंभ हो गए हैं। केंद्रीय जल आयोग की टीम ने गंगा खादर क्षेत्र का दौरा कर गंगा के पश्चिम तट का निरीक्षण किया। पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्राचीन तीर्थ शुक्रताल में वर्षों से गंगा की मुख्य धारा को लाने की मांग चली आ रही है। पिछले दिनों केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान के समक्ष भी क्षेत्रवासियों ने इस मांग को रखा था।
जिसके परिणाम स्वरूप केंद्रीय मंत्री के आदेश पर शुक्रवार को तकनीकी टीम शुक्रताल पहुंची। जहां भाजपा नेता और नमामि गंगे के सदस्य डॉ. वीरपाल निर्वाल ने टीम का स्वागत करते हुए अधिकारियों का मार्गदर्शन किया। निर्वाल ने बताया कि केंद्रीय मंत्री के प्रयासों के चलते तकनीकी टीम शुक्रताल खादर क्षेत्र में गंगा के पश्चिमी तट का दौरा करेगी।
टीम में केंद्रीय जल आयोग के समर्थलाल मीणा निदेशक प्रबोधन निदेशालय आगरा, दिनेश कुमार गोयनर उपनिदेशक केंद्रीय जल आयोग और एके वालिया असिस्टेेंट इंजीनियर ड्रेनेज डिवीजन मेरठ ने बाण गंगा के सोनाली नदी के समागम क्षेत्र भोकरहेड़ी होते हुए लक्सर-बालावाली से 10 किमी पश्चिम बहाने की ओर
बंद बहाने को खोलने के लिए छह किमी क्षेत्र में संभावित कार्य का निरीक्षण किया। जिसमें चार किमी जनपद बिजनौर और दो किमी उत्तराखंड क्षेत्र का भाग सम्मिलित है। उत्तराखंड क्षेत्र के गांव चंदपुरी क्षेत्र से इस कार्य का आरंभ किया जाएगा। जिसमें अनुमानित 10 से 12 करोड़ रुपये व्यय होना आंका गया है। निरीक्षण दल अपनी रिपोर्ट केंद्रीय आयोग को भेजेगा।