शुकतीर्थ में निरीक्षण करती अधिकारियों की टीम।
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गंगा दशहरा पर्व मानवता के कल्याण का प्रतीक : ओमानंद
शुकतीर्थ/मोरना। लॉकडाउन की वजह से इस बार ज्येष्ठ गंगा दशहरा पर्व शुकतीर्थ में गंगा दशहरे का मेला नहीं लगेगा। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने कहा कि गंगा दशहरा मानवता के कल्याण का प्रतीक है।
पौराणिक शुकतीर्थ में पहली बार सोमवार यानि आज ऐसा होगा, जब ज्येष्ठ गंगा दशहरा पर मेला नहीं लगेगा। संतों, महात्माओं और पुरोहितों ने लोगों से ज्येष्ठ गंगा स्नान पर्व घरों पर ही श्रद्धा से मनाने का आह्वान किया है। शुकदेव आश्रम, हनुमतधाम, दंडी आश्रम, शिवधाम आदि मंदिरों, शिवालयों, धामों के कपाट आठ जून तक बंद है। भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने बताया कि शुकतीर्थ में पहली बार कोरोना संकट के चलते तीर्थनगरी में पहली बार ऐसा हुआ है। भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मोक्षदायिनी मां गंगा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। यह स्नान पर्व पर पापों के शमन एवं पितरों की मोक्ष प्राप्ति को दान, तर्पण आदि की परंपरा है। साथ ही तन, मन, धन रूपी त्रिविध शुद्धि तथा आत्म व पितृ कल्याण का महा पर्व है, जो मानवमात्र को अर्पण, तर्पण और समर्पण का संदेश देता है। लॉक डाउन की परिस्थितियों में श्रद्धालु सुबह घरों पर स्नान करें। जीवनदायिनी मां गंगा का पवित्र मन से ध्यानकर पूजन करें। पितरों के कल्याण को असहाय, जरूरतमंदों और पुरोहितों को श्रद्धा भक्ति से दान करें। कथा व्यास आशीष माधव शास्त्री ने बताया कि गंगा दशहरा पर्व पर पुण्य के लिए पशु-पक्षियों को चारा, भूसा और अन्न खिलाएं। उधर, सीओ भोपा राममोहन शर्मा ने शुकतीर्थ में भ्रमण कर लॉकडाउन पालन के निर्देश दिए। गंगा घाटों का निरीक्षण किया। बताते चले कि जिला पंचायत ने कोरोना संकट में दो दिवसीय मेला पहले ही स्थगित कर दिया था।