बुढ़ाना में पेट्रोल पंप पर हंगामा करते ग्राहक।
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बुढ़ाना में 500 और 1000 के नोट बंद होने से कस्बा तथा देहातों का बाजार पूरी तरह प्रभावित हुआ। छोटे से लेकर बडे़ व्यापारी के व्यापार पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ा। मंगलवार को टीवी पर नोट बंद होने की सूचना देखकर लोग सकते में आ गए। इस सूचना से घरेलू महिलाएं सबसे अधिक आहत र्हुइं।
गांव खेड़ामस्तान निवासी विमलेश, मुकेश, सतबीरी आदि का कहना है कि उन्होंने कुछ रुपये इकट्ठे किये थे। छोटे-छोटे नोटों को उन्होंने दुकानदारों के यहां जाकर समय-समय पर बडे़ नोटों में बदल लिया था। बड़े नोटों का चलन बंद होने से समझ में नहीं आ रहा अब क्या करें। वहीं, कस्बे से लेकर देहात के बाजारों में दुकानदार खाली बैठे दिखाई दिए। 500 के नोट लेने से दुकानदारों मना कर दिया।
व्यापारी अंशुल गोयल और अंकुर गोयल, कपड़ा व्यापारी राकेश सैनी, मेडिकल स्टोर एसोसिएशन के अध्यक्ष सतेंद्र सैनी, रेडीमेड गारमेंट के इशांत गर्ग, राजू गोयल, तेल व्यापारी राकेश गर्ग आदि का कहना है कि बडे़ नोटों का चलन से बाहर होने के कारण उनके व्यापार पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। छोटे नोट लेकर ग्राहक नहीं आए। बडे़ नोट लेने से उन्होंने मना कर दिया। जिसके कारण छोटे से लेकर बड़ा व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ।
सीमेंट विक्रेता थोक व्यापारी तथा विभिन्न टू व फोर व्हीलर एजेंसियों के मालिकों पर भी इसका प्रभाव रहा। तहसील मुख्यालय पर सब रजिस्ट्री कार्यालय में अधिकतर बैनामे बडे़ नोट होने के कारण वापस चले गए। बडे़ नोटों का चलन बंद होने से जहां एक ओर आम आदमी से लेकर छोटा दुकानदार भी इससे प्रभावित होगा। वहीं पर दूसरी ओर सरकार को भी राजस्व में काफी हानि होगी।