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पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के चार पदाधिकारी हिरासत में

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पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के चार पदाधिकारी हिरासत में
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मुजफ्फरनगर। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन की पुलिस जांच के दौरान पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का नाम शक के दायरे में है। इसकी भनक लगते ही जनपद से संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी भूमिगत हो गए थे, जिनमें से चार लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इनसे पूछताछ के बाद पुलिस संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं की धरपकड़ के साथ ही इसका नेटवर्क तोड़ने की कवायद में जुट गई है।
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शुक्रवार को शहर में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने इसके कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया जांच के दौरान पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम सामने आया था, जिसके पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने न केवल युवाओं को सीएए व एनआरसी को लेकर भ्रमित किया, वहीं युवा वर्ग को हिंसक प्रदर्शन करने के लिए भी उकसाया। यही नहीं, विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए महज 12 घंटे पूर्व भीड़ जुटाने से संबंधित पर्चे वितरित कराए गए और एक वर्ग के क्षेत्रों में गुपचुप तरीके से बैठकें कर युवाओं को एक नियत स्थान पर पहुंचने के लिए तैयार किया। सूत्रों के मुताबिक उपद्रव में पीएफआई की संदिग्ध गतिविधियां पाए जाने के बाद जांच में इस संगठन को शामिल कर लिया गया है। संगठन के चार पदाधिकारियों को हिरासत में भी ले लिया गया है, जिन्हें गोपनीय स्थान पर रखकर उनसे पूछताछ करते हुए संगठन का पूरा नेटवर्क तोड़ने की कवायद की जा रही है। वहीं, पुलिस-प्रशासन की निगाहों में आने की भनक लगते ही संगठन ने अपनी गतिविधियों को पूरी तरह समेट लिया है और उसके सक्रिय पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी भूमिगत हो चुके हैं, जिनकी धरपकड़ के लिए एक विशेष टीम को लगा दिया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही हिंसक विरोध प्रदर्शन की पूरी साजिश को बेनकाब कर दिया जाएगा, जिसमें कई बड़े रसूखदार व कथित समाजसेवी भी इसकी जद में आ सकते हैं। एसएसपी अभिषेक यादव का कहना है कि पीएफआई को लेकर कुछ खुलासे हुए हैं, जिनसे यह संगठन शक के दायरे में हैं। संगठन से जुड़े कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। शांति व्यवस्था कायम होने के बाद जल्द ही तथ्यों के साथ पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
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