विधानसभा चुनाव में दौड़ी रोडवेज की बसों के किराए के एवज में डिपो पांच करोड़ रुपये लेगा। आयोग पर डिपो की 90 से अधिक बसों का किराया बना है। एक बस रोजाना करीब 19 हजार रुपये में दौड़ी है। अधिकारियों ने बिल की फाइल बनाकर शासन को भेज दी है। शासन से ही आयोग को फाइल जाएगी, जिसके बाद निगम के खाते में पैसा आएगा।
सूबे में हुए विधानसभा चुनाव की तीन जनवरी को अधिसूचना जारी होते ही प्रशासन ने डिपो की बसों को अधिग्रहण करना शुरू कर दिया था। मतदान होने से लेकर रिजल्ट आने तक डिपो की करीब 90 से अधिक बसें अधिग्रहीत की गई। इनमें अधिकांश बसें डेढ़ माह से अधिक समय तक चुनाव में दौड़ी है।
चुनाव खत्म होने के बाद शासन स्तर से डिपो अधिकारियों से चुनावी खर्च और बसों के किराए का ब्यौरा मांगा गया। डिपो की एक बस रोजाना 19 हजार रुपये के किराए से दौड़ी है। डिपो से बसों का किराया चुनाव आयोग पर करीब पांच करोड़ रुपये बने हैं। किराया संबंधित फाइल बनाकर डिपो से शासन को भेजी गई है।
शासन से ही चुनाव आयोग को किराए की फाइल भेजी जाएगी, जिसके बाद चुनाव आयोग निगम के खाते में पैसा ट्रांसफर करेगा। हालांकि निगम के खाते में आने वाला पैसा डिपो की आय में जोड़ा जाएगा। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि किराए से संबंधित फाइल भी शासन को भेजी गई है। निगम द्वारा ही चुनाव आयोग फाइल भेजी जाएगी। उसके बाद भुगतान आएगा, यह भुगतान डिपो की आय में जोड़ा जाएगा।
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