मुजफ्फरनगर। लोकतंत्र में विश्वास रखते हुए अंहिसात्मक आंदोलन के सहारे मास्टर विजय सिंह 26 साल से लगातार धरने पर बैठे हैं। गांव चौसाना में भूमाफिया के कब्जे से तीन हजार बीघा सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराने को लेकर जवानी में 1996 में धरने पर बैठे विजय सिंह बुढापे की दहलीज पर है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानीं। विजय सिंह का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में कई बार उन पर हमले हुए है। अफसरों ने उन्हें प्रताड़ित किया। मुजफ्फरनगर की कचहरी से तत्कालीन डीएम सेल्वा कुमारी जे ने उनका धरना जबरन उठा दिया। वह शिवचौक पर धरना दे रहे हैं। उन्हें भारतीय लोकतंत्र पर विश्वास है कि एक दिन उनकी सुनी जाएगी और अपराधी जेल की सलाखों के पीछे होंगे। विजय सिंह यह भी कहते हैं कि वह अपने लिए कोई लड़ाई नहीं लड़ रहे है, सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कर गरीबों में बांटा जाए। यह कार्य सरकार का है, लेकिन आज तक कोई सरकार नहीं कर सकी। सभी दलों की सरकार उनके इस आंदोलन के बीच में आ चुकी हैं। बावजूद इसके पूरा विश्वास है कि अहिंसात्मक आंदोलन से एक दिन न्याय जरूर मिलेगा।
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न्याय की जंग में एक हजार महिलाएं जोड़ी
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मुजफ्फरनगर। ग्रामीण अंचल की दलित और अति पिछड़े वर्ग की महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए जन कल्याण उपभोक्ता समिति के अध्यक्ष मनेश गुप्ता संघर्ष कर रहे हैं। 25 साल से उनका संघर्ष लगातार चल रहा है। मनेश गुप्ता ने एक साथ एक हजार महिलाओं का समूह है। गुप्ता ने 1997 में संघर्ष की शुरूआत की। 78 वर्षीय मनेश गुप्ता ने आरटीआई के माध्यम से गरीब लोगों को उनके अधिकार दिलाने के लिए अभियान चलाया। मनरेगा में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। नेशनल फूड सिक्योरिटी को लेकर अभियान चलाया। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ वह लगातार जूझते हैं। हाल ही जिला चिकित्सालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका आंदोलन चर्चाओ में रहा। गुप्ता के दो भाई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं। जिले में वह अकेले आंदोलनकारी है जो एक आवाज पर एक हजार महिलाओं की भीड़ एकत्र कर देते हैं।