रतनपुरी/खतौली में गांव फुलत में एक दिन में बुखार ने महिलाओं सहित चार की जान ले ली। ग्रामीणों की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। जानलेवा बुखार से एक ही दिन में चार मौत होने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 500 ग्रामीण बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के विरुद्ध भारी रोष व्याप्त है।
रतनपुरी के गांव अब्दुल वहाब (50) पुत्र अब्दुल मजीद पिछले तीन-चार दिनों से बुखार से पीड़ित चल रहा था। परिवार के लोग इलाज कराने के लिए उसको मेरठ के किसी अस्पताल में ले गए थे। शनिवार को मेरठ अस्पताल में उपचार के दौरान अब्दुल वहाब की मौत हो गई। गांव निवासी मंगता(70) पुत्र नियामत भी चार-पांच दिनों से बुखार से पीड़ित था। शनिवार को मंगता की घर पर ही मौत हो गई। गांव निवासी चंद्रभान की पत्नी रामवती (65) को कई दिनों से बुखार था। परिवार के लोग उसका चिकित्सक के यहां इलाज भी करा रहे थे। शनिवार को रामवती की भी मौत हो गई। इनके अलावा गांव के शमसुद्दीन मलिक की पुत्री फरहा (18) दो दिन से बुखार से पीड़ित चल रही थी। शनिवार को फरहा की हालत बिगड़ने लगी तो परिवार के लोग उसको खतौली में चिकित्सक के यहां इलाज कराने के लिए गांव से आ रहे थे। रास्ते में ही किशोरी फराह की मौत हो गई।
चार की मौत से परिवारों में कोहराम मचा है। ग्रामीणों ने बताया कि महिलाओं व बच्चों सहित करीब 500 लोग बुखार से पीड़ित हैं। ग्राम प्रधान प्रेमपाल ने बताया कि गांव में ऐसा कोई घर नहीं बचा है, जिसमें बुखार से पीड़ित न हों। उन्होंने बताया कि बुखार के प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवगत कराकर कैंप लगाने की मांग की गई थी।
इसके बावजूद आज तक स्वास्थ्य विभाग का एक भी चिकित्सक गांव में नहीं पहुंच सका है। जिसको लेकर ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी रोष व्याप्त है। ग्राम प्रधान व ग्रामीणों का कहना है कि गांव से इलाज के लिए काफी दूर खतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाना पड़ता है। जिस कारण मरीजों को लाने के लिए भारी दिक्कतों का समना करना पड़ता है। इसलिए उन्होंने गांव में ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाने की मांग की है।
बुखार से एक और किशोर की मौत
मीरापुर। गांव चुड़ियाला में बुखार के प्रकोप के कारण मौतों का सिलसिला जारी है। एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित रहने वाले 13 वर्षीय किशोर की मौत से गांव में कोहराम मचा है। मृतक बालक के पिता दिलशाद पठान ने बताया कि उनका बेटा मो. कैफ एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित था। कैफ को मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आराम न मिलने पर किशोर को दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद कैफ को नहीं बचाया जा सका। शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे कैफ ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। परिजनों ने अपने लाड़ले के शव को गांव लाकर सुपुर्दे खाक कर दिया। इस गांव में मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नही ले रहा है। बुखार के नाम से लोग दहशतजदा हैं।
हिरनवाड़ा में बुखार से एक दिन में तीन की मौत
शामली/बाबरी में गांव हिरनवाड़ा में शनिवार को बुखार से तीन मौतें बुखार से होने के चलते गांव में हड़कंप मच गया। गमगीन माहौल में बच्चे के शव को तो सुपुर्द ए खाक कर दिया गया, जबकि दो अन्य मृतकों का अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा। क्षेत्र में बुखार ने कोहराम मचा रखा है। बाबरी क्षेत्र के गांव हिरनवाड़ा निवासी परदेशी पुत्र जगराम साठ वर्ष तथा पन्हटी 70 वर्ष को पिछले कई दिनों से बुखार आ रहा था। बुखार के चलते परिजन दोनों का इलाज करा रहे थे, लेकिन बुखार से उनको आराम नहीं मिल सका। आखिरकार शनिवार की शाम दोनों ने दम तोड़ दिया। जिससे उनके परिजनों में कोहराम मच गया। उधर गांव के ही नीरज के छह दिन के पुत्र को लगातार बुखार आ रहा था। जिसके चलते परिजन उसका इलाज चंडीगढ़ में करा रहे थे, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और नवजात की भी बुखार से शनिवार को मौत हो गई।