कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन करते भाकियू कार्यकर्ता।
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भारतीय किसान यूनियन गंगा खादर के उन किसानों के समर्थन में उतर आई है, जिनकी फर्जी पट्टों के नाम पर जमीन छीन ली गई है। वास्तविक किसानों को जमीन वापस कराने की मांग को लेकर बीकेयू ने डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन किया। एडीएम वित्त को एक ज्ञापन दिया, जिसमें चार दिन में समस्या का समाधान निकालने की मांग रखी गई।
भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने कहा कि दो साल पहले जिले में भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान चलाया गया। इस अभियान में प्रशासन ने हजारों बीघा भूमि माफियाओं से खाली कराई और वन विभाग को सौंप दी। इनमें कुछ ऐसे किसानों की जमीन भी छीन ली गई, जिनके बाप, दादा लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं। ऐसे किसान जिनके पट्टे भी फर्जी नहीं हैं।
जो वास्तव में जमीन के हकदार हैं, उन्हें उनकी जमीन मिलनी चाहिए। भाकियू के धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि भाकियू किसी भू माफिया के साथ नहीं है, जो कार्रवाई हुई उसमें भी कुछ बड़े भूमाफिया बच गए हैं। जिला प्रशासन ने ऐसे लोगों के खिलाफ तो कार्रवाई नहीं की। गेहूं के साथ घुन के रूप में कुछ गरीब किसानों को उजाड़ दिया है। भाकियू उन गरीब किसानों के साथ जिनकी जमीन छीनकर उनकी भूखो मरने की स्थिति कर दी गई है। यह आरोप भी लगाया कि भूमाफियाओं के साथ कुछ ऐसे लोगों को भी जेल भेज दिया, जिनका जमीनों से कोई लेनादेना नहीं था।
धरना प्रदर्शन के बाद एडीएम को दिए ज्ञापन में जानसठ तहसील के ऐसे किसानों को चिन्हित कर जमीन वापस दिलाने की मांग रखी गई। जिला प्रशासन को चार दिन में समस्या का समाधान निकालने के लिए कहा गया। एडीएम वित्त सुनील सिंह ने आश्वासन दिया कि वह इस पूरे मामले की जांच कराएंगे। धरना-प्रदर्शन में काफी संख्या में पीड़ित किसानों ने भाग लिया।