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गन्ने की फसल को लेकर किसान चिंतित

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गन्ने की फसल को लेकर किसान चिंतित
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बुढ़ाना। चीनी मिलों का गन्ने का पेराई सत्र अपने अंतिम चरण में है। कस्बा व देहात के किसान के पास 30 से 35 प्रतिशत गन्ना खेतों में खड़ा है। सभी किसानों की गन्ने की पर्चियां बहुत कम रह गई है। देहात में चल रहे निजी कोल्हू व गन्ना क्रेशर लॉकडाउन की घोषणा के बाद बंद हो गए हैं। गन्ने की समस्या किसानों के सिर का दर्द बनी हुई है।
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अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह तक कस्बा व देहात का गन्ना किसान अपने गन्ने की फसल को चीनी मिल, कोल्हू व क्रेशर पर डालकर गन्ने की फसल से मुक्ति पा लेता था। इस वर्ष बेमौसम हुई बरसात ने गन्ने की फसल को लेट कर दिया। कम इंडेंट की समस्या भी किसानों को परेशान करती रही। लॉकडाउन की घोषणा होने के कारण कोल्हू में काम कर रहे मजदूर अपने-अपने घरों को चले गए। निजी कोल्हू व क्रेशर मजदूरों के अभाव में बंद हो गए। कोल्हू व क्रेशर बंद होने केे कारण गन्ना किसान के सामने समस्या खड़ी हो गई। गर्मी की मौसम में कस्बा व देहात में हर चौराहे पर गन्ने का जूस बेचने वाले दुकानदार भी लॉकडाउन के कारण जूस नहीं बेच सके। इन सभी परिस्थितियों के कारण किसान की गन्ने की 30-35 प्रतिशत फसल खेतों में खड़ी हुई है। बजाज चीनी के उपाध्यक्ष राजसिंह चौधरी का कहना है कि वे किसान के एक-एक गन्ने को खरीदेंगे। गन्ना किसानों का कहना है कि उनके पास पर्चियां नही है। वे अपना गन्ना किस आधार पर चीनी मिल को देंगे। गन्ना समिति की सचिव बी के राय का कहना है कि खेतों का दुबारा सर्वे करवाकर किसान का बेसिक कोटा बढ़ाया जाएगा। किसान के सारे गन्ने की खरीद करवाई जाएगी। भाकियू नेता अनुज बालियान, फुगाना के चौ. थामसिंह व मुकेश, गढीसखावतपुर निवासी रामनिवास सहरावत आदि का कहना है कि सरकार को सभी किसानों का बेसिक कोटा बढ़ाकर जल्दी से जल्दी गन्ने की पर्चियां जारी करनी चाहिए।
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