मुजफ्फरनगर। बजट से लोहा और पेपर उद्यमियों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली। उद्यमियों का कहना है कि सरकार को और अधिक फोकस करना चाहिए था। छोटे और मझोले उद्योगों के लिए विशेष घोषणाएं की गई, लेकिन इस्पात उद्योग को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उद्यमी कहते हैं कि बजट में आयात पर अंकुश लगाने की मांग अधूरी रह गई।
आयतित एचआर क्वायर से मिल रही चुनौती: कंसल
उद्यमी भीमसेन कंसल का कहना है कि मौजूदा बजट में लोहा उद्योग के लिए कोई राहत नहीं दी गई। विदेश से एचआर क्वायल सस्ते दाम में आयात हो रहा है। यदि उस पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ जाती तो स्थानीय स्टील उद्योग को काफी राहत मिलती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाहर से सस्ता स्टील उत्पाद आएगा तो स्थानीय उद्यमियों को राहत नहीं मिल पाएगी।
एंटी डंपिंग ड्यूटी नहीं बढने से मुश्किल: राजीव जैन
उद्यमी राजीव जैन का कहना है कि बजट से पूर्व आशा थी कि इस्पात आयात पर एंटी डंपिंग ड्यूटी बढ़ाई जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस कारण लोहा उद्योग को कोई राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही। स्टेनलेस स्टील पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाई गई है। लेकिन उसका स्थानीय लोहा उद्योग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पेपर और लोहा उद्योग के लिए बजट में कुछ नहीं: पंकज अग्रवाल
यूपी पेपर मिल एसोसिएशन अध्यक्ष और पालिका के पूर्व चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कहना है कि इस समय पेपर उद्योग काफी संक्रमण के दौर से गुजर रहा है, लेकिन बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया। जनपद की अर्थव्यवस्था में काफी हद तक लोहा और पेपर उद्योग की अहम भूमिका है, लेकिन दोनों उद्योगों से जुड़े व्यवसायी बजट से निराश हुए हैं।
बजट अच्छा पर लोहा उद्योग के लिए कुछ नहीं : सतीश गोयल
उद्यमी सतीश गोयल का कहना है कि बजट अच्छा है। आयकर सीमा का स्लैब बढ़ाए जाने से मध्यम वर्ग को काफी राहत मिलेगी। लेकिन बजट में लोहा उद्योग को राहत देने के लिए कोई खास प्रावधान नहीं किया गया। बजट में सरकार ने कर अनुपालन को आसान बना दिया है और व्यापार के विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार किए हैं।
पंकज अग्रवाल, अध्यक्ष यूपी पेपर मिल एसोसिएशन- फोटो : संवाद
पंकज अग्रवाल, अध्यक्ष यूपी पेपर मिल एसोसिएशन- फोटो : संवाद