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गन्ने की सूखी पत्तियों से खाद बनाएं किसान : द्विवेदी

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गन्ने की सूखी पत्तियों से खाद बनाएं किसान : द्विवेदी
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मुजफ्फरनगर। जिले में गन्ने की सूखी पत्ती से खाद बनाने के लिए गन्ना विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है। गन्ना विभाग की टीम किसानों के खेतों में पहुंच रही है और उन्हें पत्ती जलाने के नुकसान बता रही है। किसानों को बताया जा रहा है कि हमारी जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में गन्ने की पत्ती का खाद सहयोगी सिद्ध होगा।
जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि गन्ने की सूखी पत्तियों को जलाना अज्ञानता है। गन्ने के कुल बायोमास का लगभग 10 से 15 प्रतिशत मात्रा सुखी पत्तियों का होता है, जिसको प्रबंधन कर जहां एक ओर भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। वहीं इसे न जलाकर पर्यावरण को भी होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। डीसीओ ने गन्ने की सूखी पत्तियों को जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। कहा कि इससे जमीन का तापमान बढ़ता है, जिससे मित्र कीट जैसे केंचुआ आदि मर जाते हैं।
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मिट्टी के अंदर सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या कम होने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। फसल की जल मांग बढ़ जाती है। वायु मंडल प्रदूषित हो जाता है। किसान यदि गन्ने की सूखी पत्तियों का प्रबंधन करें तो इससे मृदा जीवांश 0.2 से 0.3 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। मृदा की नमी बढ़ेगी, जिससे सिंचाई में कमी आएगी। साथ ही मृदा के मित्र कीटों व जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि होगी।
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पत्तियां जलाईं तो गन्ने की आपूर्ति बंद होगी
मुजफ्फरनगर। डीसीओ डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि जनपद के जिन किसानों द्वारा गन्ने की पत्तियों का प्रबंधन न कर उन्हें जलाया जाएगा, उनके गन्ने की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाएगी। पत्तियों के प्रबंधन से सभी गन्ना समितियों में किराए पर मल्चर उपलब्ध है। जनपद की 13 साधन सहकारी समितियों और चार ग्राम पंचायतों में भी मल्चर उपलब्ध हैं, जिनको किसान किराए पर लेकर गन्ने की सूखी पत्तियों का प्रबंधन कर सकते हैं। डीसीओ ने गांव नावला और बोपाडा में खेतों जाकर किसानों को मल्चर के लिए प्रोत्साहित किया। गन्ना विभाग की टीमें किसानों के बीच पहुंचकर उन्हें समझाने का काम कर रही है।
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