भूमि अधिग्रहण के विरोध में जेसीबी के सामने लेटे किसान
तितावी/मुजफ्फरनगर। पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर अधिग्रहीत की गई जमीन पर कब्जा करने पहुंचे प्रशासन और किसानों के बीच पूरे दिन टकराव की नौबत बनी रही। किसान जेसीबी के सामने लेट गए। एक महिला ने जेसीबी चालक के साथ मारपीट की और किसानों ने तितावी थाने पर गन्ना डाल दिया। शाम तक चली रस्साकशी के बीच प्रशासन को बैरंग लौटना पड़ा। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि दादागीरी के दम पर जमीन पर कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन पहले किसानों की फसलों का मुआवजा दे उसके बाद कब्जा करें। धौलरा में देर रात तक किसानों का जमावड़ा लगा रहा। भाकियू मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि शुक्रवार को यदि मांग पूरी नहीं हुई तो रोड जाम किया जाएगा।
पानीपत-खटीमा राजमार्ग के निर्माण में धौलरा और आसपास के गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई है। अधिग्रहीत जमीन का प्रशासन किसानों को 252 करोड़ का भुगतान कर चुका है। बृहस्पतिवार को जमीन पर कब्जा लेने के लिए जिला प्रशासन की टीम एडीएम वित्त आलोक कुमार, एडीएम प्रशासन अमित सिंह, एसडीएम सदर दीपक कुमार, एसडीएम बुढ़ाना भूपेंद्र सिंह, एसडीएम जानसठ, एसपी देहात नेपाल सिंह, सीओ राम मोहन शर्मा के नेतृत्व में धौलरा पहुंची। टीम के साथ तितावी, भौराकला, शाहपुर, फुगाना की पुलिस और तीन गाड़ी पीएसी मौजूद रही। धौलरा में चिरवा टिल्ला पर एकत्र किसानों ने प्रशासन का विरोध किया। किसानों का आरोप था कि जब तक सभी किसानों को मुआवजा नहीं मिल जाता जमीन पर कब्जा नहीं होने देंगे। कुछ किसान जेसीबी के सामने लेट गए। एक महिला ने जेसीबी चालक की गन्ने से पिटाई कर डाली।
प्रशासन और किसानों के बीच यहां तनाव की स्थिति बन गई। किसानों ने कहा कि या तो उन पर लाठीचार्ज करो या उन्हें गिरफ्तार करो। हम पूरा मुआवजा मिले बिना कब्जा नहीं होने देंगे। सुबह से लेकर शाम तक कई दौर की वार्ता किसान नेताओं और प्रशासन के बीच हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। शाम को भाकियू ने तितावी थाने में गन्ना भर दिया। टकराव के हालात को देखते देर रात प्रशासन वापस हो गया। देर रात धरने पर भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत पहुंच गए। उन्होंने कहा कि प्रशासन बातचीत से समस्या का हल करें।
दादागीरी से जमीन पर कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए। ट्यूबवेल का मुआवजा मात्र 70 हजार दिया जा रहा है, जबकि ट्यूबवेल अब चार लाख में लग रहा है। खेत के पेड़ के मात्र 100 रुपये लगाए गए हैं। मकान का मुआवजा भी काफी कम है। प्रशासन को किसानों की समस्या पर गंभीरता से सोचना चाहिए। प्रदेश उपाध्यक्ष ओमपाल मलिक, धर्मेंद्र मलिक, नवीन राठी, कपिल सोम, अशेाक घटायन, सुभाष मलिक, भाकियू जिलाध्यक्ष धीरज लाटिया, विकास शर्मा, अमरजीत, परवीन गोलियान, सन्नी, सुदेश मिस्त्री, विकास सैनी, सचिन मलिक, टीटू मलिक, छोटू, भगत सिंह, सुनील लाटियान, विपुल निर्वाल, प्रवेंद्र, ओमपाल, अफजाल आदि मौजूद रहे।
इन किसानों को नहीं मिला मुआवजा
मुजफ्फरनगर। जिन किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला इनमें उपेंद्र, मुकेश, योगेश, बिलचंद, धर्मवीर, महिपाल, भिक्का, मंटू सिंह, अनुज बाला, प्रदीप, सुभाष मलिक, सन्नी, मुकेश देवी, राजेंद्र सिंह, संदीप, अरूण, सतबीरी शामिल हैं।
आपसी विवाद के मामले ही बचे
मुजफ्फरनगर। एडीएम वित्त आलोक कुमार का कहना है कि मुआवजे को लेकर जिन किसानों का आपस में विवाद है और उन्होंने एक-दूसरे पर मुकदमा कर रखा है, केवल उन्हीं का मुआवजा बाकी है। अन्य किसानों का 252 करोड़ का मुआवजा दिया जा चुका है। अधिकतर पारिवारिक विवादों में मुआवजा उलझा है।