मोरना में सोलानी नदी में बाढ़ से पैदा हुई मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। खेत में चारा लेने गए एक किसान की बाढ़ के पानी में डूबकर मौत हो गई। किसान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने बमुश्किल शव को गहरे पानी से निकाला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। तहसीलदार मनोज कुमार ने मृतक के आश्रितों को किसान दुर्घटना बीमा राशि दिलवाने का आश्वासन दिया है।
थाना भोपा क्षेत्र के गांव मजलिसपुर तौफीर निवासी 42 वर्षीय बाबू पुत्र रतन सिंह तीन बीघा जमीन का किसान था. जिसमें फसल आदि भी ठीक प्रकार से नहीं हो रही थी। बाबू मेहनत-मजदूरी कर और पशुओं का दूध बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। सोमवार दोपहर बाद बाबू पशुओं के लिए चारा लेने के लिए खेतों पर गया था। शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई। ग्रामीण और परिजन बाबू की तलाश में जुट गए। शाम को बाबू का शव गुल्लर वाली के जंगल में पानी में उतराता हुआ मिला।
मंगलवार सुबह ग्रामीण राजू और बिट्टू ने शव को गहरे पानी से बमुश्किल बाहर निकाला। किसान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया और गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने किसान के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बाबू के भाई श्रवण, रामकुमार, राजूपाल, शेर सिंह, ग्राम प्रधान योगेश, महेंद्र सिंह, ओमकार सिंह, सुबोध आदि ने शासन-प्रशासन से मृतक किसान के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाए जाने की गुहार लगाई है।
हालात देख लौटे तहसीलदार
मोरना। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे तहसीलदार जानसठ मनोज कुमार पानी देखकर उल्टे पांव लौट गए। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के विरुद्ध रोष व्यक्त करते हुए आगामी चुनाव का बहिष्कार करने की बात कही है। ग्रामीणों ने पीडब्लूडी के जेई पर पुलियों को जान-बूझकर गहराई में बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर खादर क्षेत्र के गांवों के ग्रामीण बाढ़ की विभीषिका से त्रस्त होकर अपना जीवन गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा उनकी फरियाद सुनने को तैयार नहीं है। प्रतिवर्ष उनकी फसलें बाढ़ में बर्बाद हो जाती हैं। पुलियों के खराब निर्माण के कारण उनकी फसलों में पानी भरा रहता है।
फसलें पानी में गलकर बर्बाद हो जाती हैं। मंगलवार को बाढ़ क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे तहसीलदार मनोज कुमार मोरना और लक्सर मार्ग पर ही रुक गए और पानी देखकर लौट गए। वहीं, जिला पंचायत सदस्य पुत्र अमित राठी ने पीडब्लूडी एक्सईएन से बात कर शीघ्र पुलियों का निर्माण करने की बात कही। बाढ़ के पानी में डूबने से मरे किसान बाबू के आश्रितों को आर्थिक सहायता देने की मांग प्रशासन से की है।
एसडीएम ने निरीक्षण किया
एसडीएम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दौरा किया। दौरे के दौरान पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन को टूटी सड़कों को शीघ्र ठीक कराने के निर्देश दिए। वहीं, पुलिस को निर्देश किया कि वे सड़कों का ध्यान रखें, जब तक सड़कें ठीक नहीं होती। लोगों को टूटी सड़कों से गुजरने के लिए रोकें, ताकि किसी के साथ कोई हादसा न हो।
किसानों को करोड़ों का नुकसान
पुरकाजी खादर क्षेत्र में पहाड़ियों से आए सोलानी नदी में पानी से करोड़ों रुपये की फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसान इसको लेकर दुखी हैं। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। करीब दो सप्ताह तक खादर क्षेत्र में सोलानी नदी में आई बाढ़ से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि हजारों बीघा खेतों में गन्ने और धान सहित अन्य फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में पानी रुका हुआ है।
किसान गुरमीत सिंह, कांता सिंह, देविन्द्र सिंह, जसवेन्द्र सिंह, डॉ बचन सिंह गुर्जर, राजू प्रजापति, राजेंद्र पांचली, जगतार सिंह, सतनाम सिंह, डॉ राजेंद्र सिंह, राजेश कुमार, चंद्रबोस मावी, जोगेंद्र सिंह प्रधान आदि किसानों ने बताया कि पानी से ज्यादातर फसलें बर्बाद हो चुकी हैँ। किसानों ने प्रशासन से पीड़ित किसानों को फसलों का उचित मुआवजा दिलवाने की मांग की है। उधर, एसडीएम सदर शीतल प्रसाद गुप्ता का कहना है कि किसी ग्रामीण का मकान, पशु और जानमाल की हानि हुई हो तो उसे मुआवजा देने का प्रावधान है। इसके अलावा फसलों के नुकसान के संबंध में शासनादेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।