बोले परिजन, जिंदगी रही तो कहीं और खा-कमा लेंगे
मोरना (मुजफ्फरनगर)। मेन बाजार में बृहस्पतिवार देर रात हुई दवा विक्रेता अनुज कर्णवाल की हत्या के बाद उनके परिजन भी पुश्तैनी मकान छोड़कर कहीं और बसने की तैयारी कर रहे हैं। दवा विक्रेता के भाई ने जिंदगी रही तो कहीं ओर भी खा-कमा लेंगे की बात कहकर इसकी सुगबुगाहट दे दी।
कस्बा निवासी डॉ सुशील कर्णवाल व उनके पूर्वज दशकों से कस्बे में ही रह रहे हैं, जहां उनका पुश्तैनी हवेलीनुमा मकान है। सुशील कर्णवाल की मौत के बाद उनके तीन बेटों ने परिवार को बखूबी संभाला। इनमें से बड़ा बेटा जगमोहन जिला महिला अस्पताल में फॉर्मासिस्ट के पद पर कार्यरत है। मंझला बेटा हरिकांत कस्बे में ही प्ले स्कूल चलाते हैं, जबकि छोटा बेटा अनुज कर्णवाल मेडिकल स्टोर चलाता था। मध्यमवर्गीय परिवार के नाते अनुज की पत्नी अंजीता भी कस्बे के ही एक निजी स्कूल में बतौर शिक्षिका अध्यापन कराती है। पूरा परिवार हंसी-खुशी अपनी जिंदगी बसर कर रहा था, लेकिन बृहस्पतिवार देर रात आए तूफान ने कस्बे से जुड़ी पूर्वजों की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। अनुज कर्णवाल की दुस्साहसिक हत्या से आहत बड़े भाई जगमोहन कर्णवाल की भावुक भावनाएं शनिवार को स्पष्ट नजर आईं, जिसमें उन्होंने रुंधे गले से कहा अपनी पुश्तैनी हवेली-दुकान को कौन छोड़कर जाना चाहता है। यहां से पूर्वजों के साथ ही बचपन की भी यादें जुड़ी हुईं हैं, लेकिन बदले हालात में पूरा परिवार खौफजदा है। विशेषकर वे बच्चे व महिलाएं, जिनके सामने ही अनुज की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। ऐसे में जान है तो जहान है के चलते यहां रहना सुरक्षित नहीं लग रहा है। जिंदगी रही तो कहीं ओर भी खा-कमा लेंगे, वरना बच्चों व परिजनों का क्या होगा।