इस पूरे खेल में सहदेश व मुरसलीन नकली दवाइयां बनाकर तैयार करते थे, जबकि बलराज गर्ग इन दवाइयों को सूबे के कई जनपदों में सप्लाई करता था। औषधि निरीक्षक ने बताया कि नकली दवाइयों का यहा काला धंधा कई जनपदों में चल रहा था, जिससे लाखों लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा था।
तीनों आरोपियों को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया है। वहीं, आरोपियों से पूछताछ में अन्य लोग भी सामने आए हैं, जिनके इस धंधे में शामिल होने की पुष्टि होने के बाद उन्हें भी जांच में शामिल किया जाएगा।
जिले में ही डेरा डाले हुए है टीम
मुजफ्फरनगर जिला औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद ने बताया कि कानपुर एसटीएफ के साथ ही अन्य सभी जनपद से वाले अफसर जनपद में ही डटे हुए हैं। संभवत: टीम अभी इस मामले में ओर भी कार्रवाई कर सकती है।
ये सामान हुआ बरामद
- 19 स्ट्रिप अल्ट्रासेट टैबलेट
- 35 किलो वजन के ग्रेन्यूल (कैप्सूल में भरने वाले रंगीन दाने)
- तीन कैप्सूल फिलिंग मशीन
- दो बिलिस्टर पैकिंग मशीन
- एक टैबलेट पंचिंग मशीन
- एक कोटिंग, एक ग्राइंडर
- एक सिलिंग मशीन
- दो सौ ग्राम एल्युमीनियम फॉइल
-आठ होलोग्राम स्ट्रिप