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Muzaffarnagar News: नकली सीबीआई अधिकारी ने अधिवक्ता, पत्नी को रखा 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट

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मुजफ्फरनगर। साइबर ठगों ने एक अधिवक्ता व उनकी पत्नी को उनके ही घर में 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट रख कर 15 लाख रुपये की ठगी का प्रयास किया। सीबीआई के नाम पर सर्विलांस रुल्स, गिरफ्तारी वारंट व्हाट्सएप पर भेजे गए। एक घंटे की मोहलत मांग कर दंपती साइबर ठगी से बच सका। मामले में शिकायत के एक माह बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
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नगर के अंकित विहार निवासी अधिवक्ता ओंकार सिंह तोमर ने एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि पिछले वर्ष अगस्त माह में उनका पर्स योगा एक्सप्रेस ट्रेन में गाजियाबाद जाते समय खो गया था। पर्स में आधार कार्ड, पैनकार्ड, 21 हजार रुपये थे। इसकी शिकायत गाजियाबाद के विजयनगर थाना में की थी।
16 जून 2025 को करीब 12 बजे दोपहर ट्राई के कर्मचारी दीपक गुप्ता की वीडियो कॉल आई। पीड़ित अधिवक्ता ने जानकारी दी कि उन्हें बताया गया कि उनके नाम से कोई सिम कार्ड मुंबई के कुलावा में जारी हुआ है। इसकी क्लीरियेंस के लिए क्राइम ब्रांच मुम्बई से राहुल यादव ने बात की। उसने बताया कि मुंबई में उनका व नरेश गोयल का खाता है। खाते में 6.8 करोड का अवैध लेन देन हुआ है।
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काॅल करने वाले ने उन्हें डराकर घर जाने को कहा। घर पहुंचने पर करीब 2 बजे के बाद एक अन्य पुलिस वर्दीधारी व्यक्ति ने सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की। परिजन व अन्य किसी से भी बात न करने को कहा। इस समय पीड़ित की पत्नी भी वहां मौजूद थी। अधिवक्ता की बेटी उनसे मिलने पहुंची तो दंपती ने डर के कारण उसे वापस भेज दिया। कॉल करने वाले ने उन्हें सीबीआई के नाम पर सर्विलांस रुल्स, गिरफ्तारी वारंट व्हाटसएप पर भेजे।

दंपती को कमरे में 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा गया। रात में सोने के दौरान भी वीडियो कॉल जारी रही। मोबाइल को चार्जर पर लगवाया दिया गया। अगले दिन सुबह सर्वोच्च न्यायालय का एकाउंट फ्रीज करने, संपत्ति एटेच करने का नोटिस भेजा गया। पहले दस लाख व फिर पांच लाख रुपये एसआईएस एकाउंट में आरटीजीएस करने को कहा गया। उन्हें स्थानीय पुलिस से गिरफ्तार कराने, तीन माह की जेल होने की भी धमकी दी।

काफी कहने सुनने पर अगले दिन दोपहर में पीड़ित दपंती को एक घंटे की मोहलत दी गई। एक घंटे बाद उन्हें फिर से अरेस्ट कराने को कहा गया। पीड़ित दंपती ने थाने जाने को भी कहा। बताया गया कि पीडि़त दंपती इतना डर चुका था कि पैसो के लिए उन्होंने अपनी पासबुक आदि भी निकाल ली थी।
उधर, अधिवक्ता ने व्हाट्सएप पर भेजे वारंट के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। कॉल बंद होने पर वह ठगी से बच गए। मानसिक उत्पीड़न के कारण अधिवक्ता की पत्नी की हालत सही नहीं है। आरोप है कि इस घटना में स्थानीय व्यक्ति भी शामिल है।

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एक माह चली जांच
पीड़ित अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने घटना के बाद एसएसपी को प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने एसपी क्राइम को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद भी कार्रवाई होने व मुकदमा दर्ज होने में एक माह का समय लग गया। अधिवक्ता ने कहा कि सभी लोग इस प्रकार की साइबर ठगी के प्रति जागरूक रहे। डरे नहीं।
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इन्होंने कहा-
डिजिटल अरेस्ट व हाउस अरेस्ट कुछ नहीं होता। दूर बैठे साइबर अपराधी वीडियो कॉल करके डराते रहते हैं। एक कमरे में अरेस्ट होना बताकर रुपये की मांग करते हैं। इन हालातों में डरे नहीं, बल्कि पुलिस में शिकायत करें। - इंदु सिद्धार्थ, एसपी क्राइम।
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