जिला चिकित्सालय के नेत्र विभाग में आंदोलनकारी विजय सिंह से एक हजार रुपये सुविधा शुल्क मांगने के मामले में दो कर्मचारियों को दोषी पाया गया है। नेत्र रोग प्रभारी की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आई है। एडीएम प्रशासन हरीशचंद्र ने सिटी मजिस्ट्रेट और एसीएमओ की संयुक्त रिपोर्ट आने के बाद सीएमओ को दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए लिखा है।
जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन कड़ा कदम उठाने जा रहा है। नेत्र रोग विभाग आंदोलनकारी विजय सिंह से एक हजार सुविधा शुल्क मांगने के मामले में प्रभारी डीएम अंकित अग्रवाल ने त्वरित कार्रवाई की है। अग्रवाल ने एडीएम प्रशासन को पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई थी। विभागीय जांच की जिम्मेदारी एसीएमओ प्रवीण चोपड़ा को दी गई थी।
सिटी मजिस्ट्रेट ने विभागीय रिपोर्ट और विजय सिंह के बयान आदि के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर एडीएम हरीशचंद्र को सौंप दी है। एडीएम ने बताया कि जांच में नेत्र परीक्षण अधिकारी कमल वत्स और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शमी दोषी पाए गए हैं। नेत्र रोग प्रभारी एमके सैन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद सीएमओ को कार्रवाई के लिए लिखा गया है। एडीएम ने कहा कि जो दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
क्या कहते हैं सीएमओ
मुजफ्फरनगर। भाजपा सरकार में अफसरशाही किस हद तक हावी है, इसका जीता जागता उदाहरण सीएमओ पीएस मिश्रा का कथन है। सीएमओ कहते हैं कि एडीएम प्रशासन के यहां से उनके पास कोई पत्र आया है, उसे अभी खोला नहीं है। कल सुबह उस पत्र को खोलकर देखेंगे, हो सकता है जांच रिपोर्ट आई हो। योगी राज में विभागों में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है और न ही अफसरशाही पर लगाम लग पा रही है।
लालच और दबाव एक साथ
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले मास्टर विजय सिंह पर लगातार दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल कर्मी पहले भी यहां दबाव में लेकर जांच दबवाते रहे हैं। विजय सिंह को पहले लालच देने की कोशिश की गई, जब वह नहीं माने तो उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। विजय सिंह का कहना है कि वह समाजहित में लड़ाई लड़ रहे हैं, उनका धरना भी गरीब जनता के हितों के लिए है। वे न तो डरने वाले हैं और न ही झुकने वाले।